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क्या सही क्या ग़लत

Posted On: 29 Nov, 2010 Others में

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यह विषय शायद आपको राजनैतिक लगे पर विशेष सन्दर्भ में यह अत्यंत गंभीर है| यद्यपि इस मसले पर पहले भी बहुत कुछ लिखा-पढ़ा और सुना जा चूका है, वाद-विवाद हुए हैं, हायतौबा भी मची है पर फिर इसपर कुछ लिखने से खुद को रोक नहीं पाया या यूँ कहें कि अंदर का राष्ट्रवाद हिलोरें मारते-मारते एक शाब्दिक त्सुनामी के रूप में बाहर आ गया|
सरकारें आती-जाती रहती हैं और अपने हिसाब से नीतियों यथा – शैक्षिक, रक्षा, विदेश, सामाजिक आदि में परिवर्तन करती रहती हैं| लालूप्रसाद के समय में बिहार बोर्ड के की सेकेण्डरी स्तर की पाठ्य पुस्तक में उनके खुद के ऊपर एक पूरा पाठ था| मालूम नहीं मगर शायद नीतिश कुमार उसे अबतक हटवा ही चुके होंगे| वाजपेयी जी के शासनकाल में एन०सी०ई०आर०टी० के पाठ्यक्रम में भी कुछ बदलाव किये गए और कुछ धार्मिक महापुरुषों की जीवनियों और धार्मिक गाथाओं को भी उसमें सम्मिलित किया गया जिसे लेकर तत्कालीन विपक्ष यानि वर्तमान सत्तापक्ष के साथ तथाकथित सेकुलर दलों और वामदलों ने ज़बरदस्त हो-हल्ला मचाया और इसे नाम दिया का गया ‘शिक्षा का भगवाकरण’| तत्पश्चात यू०पी०ए० सरकार ने अपने प्रथम शासन में एन०सी०ई०आर०टी० के पाठ्यक्रम में अपने हिसाब से बदलाव करवाए जो कहीं-कहीं इतने अस्वीकार्य लगते हैं कि संशोधकों की सोच पर तरस आता है| न ही ये बदलाव स्वीकार करने लायक हैं न ही किसी प्रकार से समाज का भला करने वाले हैं| इसके उलट, ये विद्वेष फ़ैलाने का माध्यम नज़र आते हैं| उदाहरणार्थ – प्राथमिक स्तर के बच्चों को अयोध्या और गोधरा के दंगों और आपदाओं के बारे में पढ़ाना कहाँ तक सही है, इसका उन बच्चों के कोमल और संवेदनशील हृदय पर क्या प्रभाव पड़ेगा? खुदीराम बोस, गोपाल कृष्ण गोखले और बाल गंगाधर तिलक को ‘अतिवादी’ और ‘आतंकवादी’ जैसी संज्ञाओं से नवाज़ा जाता है| यह न्यायसंगत है या फिर दुराग्रह? महान संत मीराबाई जिन्होंने मध्यकाल में सारे समाज को भक्ति के रंग में रंग दिया था उन्हें एक तुच्छ ‘नाचनेवाली’ बताया जाता है| हमारे प्राचीन, पूज्यनीय एवं आदरणीय ऐतिहासिक ग्रंथों यथा – रामायण, महाभारत आदि को सिर्फ एक पुरानी कपोल कथा का दर्ज़ा प्रदान किया जाता है| ‘कृष्ण’ को उद्दंड, उच्छश्रृंखल कामपिपासु कहा गया है जो गोपियों के साथ रमण करते थे| यह सब क्या है? हम किस दिशा की तरफ बढ़ रहे हैं| क्या यही वह तरीका है जो हमें एक विकसित धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का स्थान दिलाएगा? क्या यह सिर्फ एक वोट बैंक के तुष्टिकरण की राजनीति नहीं है?
हमारे नेताओं ने सर्वकालिक सबसे पारदर्शी और प्रासंगिक कानून पारित किया जिसे हम ‘सूचना का अधिकार’ के नाम से जानते हैं| और जब उन्होंने खुद को उसके शिकंजे में फंसता पाया तो उसमें संशोधन करके कुछ विशेष सूचनाओं को इसके दायरे से बाहर कर दिया| ‘ऑफिस ऑफ प्रोफिट’ बिल को तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा किये गए संशोधन के आग्रह को दरकिनार कर संसद ने दो-दो बार पूर्ण बहुमत से पास कर दिया| उच्च शिक्षा में आरक्षण संविधान के विरुद्ध वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण की नीति का एक और ज्वलंत उदाहरण हैं| इससे न केवल मानक स्तर ही प्रभावित होगा अपितु देश की छवि पर भी एक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा| यह केवल उनके लिए होना चाहिए जो प्रतिभाशाली होते हुए भी आर्थिक रूप से अशक्त अथवा पिछड़े हुए हैं न कि किसी जाति पंथ या संप्रदाय विशेष के लिए|
कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने यह निर्णय लिया था कि ‘वंदे मातरम’ को ‘राष्ट्र गीत’ के रूप में अपनाने की सौवीं वर्षगांठ पर इसे अनिवार्य रूप से हर विद्यालय में गवाया जायेगा परन्तु इसका एक धर्म विशेष के कुछ लोगों द्वारा सशक्त विरोध किया गया ताकि धार्मिक भावनाओं को भड़का कर उन्माद फैलाया जा सके| यह तो हद ही हो गई| यह वही गीत है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक राष्ट्रभक्तों को एकता के सूत्र में बांध रखा था| इसका महत्त्व भी हमारे राष्ट्र गान ‘जन-गण-मन’ से कम नहीं आँका जा सकता| ‘मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड’ के तत्कालीन अध्यक्ष ने इसका विरोध यह कहकर किया कि यह शरियत के कानून के खिलाफ़ है| पर मेरी दृष्टि में कोई भी धर्म अथवा कानून राष्ट्र और राष्ट्रीय एकता से ऊपर नहीं है| यदि यह शरियत के खिलाफ़ है तो कुछ उदाहरण देखें – सउदी अरब के राष्ट्र गीत में रेगिस्तान की खूबसूरती का वर्णन किया गया है| नखलिस्तान को रेगिस्तान में ‘अंगूठी के नगीने’ की संज्ञा दी गई है| यमन के राष्ट्र गीत में झरनों को ‘माँ के वक्षस्थल से झरते दूध’ की संज्ञा दी गई है – हे सारी धरा की माँ, तेरे बच्चे कृतार्थ हैं’| मिस्र का राष्ट्र गीत भी इससे जुदा नहीं है| इसी प्रकार की बातें बांग्लादेश के राष्ट्र गीत में भी कही गई हैं| यहाँ तक की पाकिस्तान के राष्ट्र गीत में भी (जिसे तीन-तीन बार रचा गया है) में ‘धरती’ और ‘नदियों’ का वर्णन किया गया है| जोर्डन का राष्ट्र गीत अपने वतन को ‘अस्सलाम-अल-मालिकी’ कह कर उसका नमन करता है| यह सभी अपने देश और अपनी धरती की पूजा करते हैं| तो क्या ये लोग काफ़िर हो गए? जबकि यह सब तो विशुद्ध रूप से इस्लामिक गणतंत्र के रूप में प्रतिष्ठित हैं| पर वंदे मातरम के विरोधी कहते हैं के सिर्फ ‘अल्लाह की इबादत’ की जानी चाहिए| तो किस बिना पर इन मुस्लिम देशों ने इस तरह के गीतों को राष्ट्र गीत के रूप में स्वीकार कर लिया जहाँ वतन और उसकी सरज़मीं की इबादत की गई है| इसका इस प्रकार से इतना विरोध क्यों किया जा रहा है?
हर कोई जाति, धर्म, क्षेत्र, प्रान्त आदि के बारे में सोचता है पर देश के विषय में नहीं जो इन सबको अपनेआप में समाहित किये हुए है और जिसके बिना हमारी कोई पहचान नहीं हो सकती| बस हो गया? क्या ये चीज़ें राष्ट्रवाद, देशभक्ति और भारतीयता से बढ़ कर और अहम हैं? इन सबके अलावा और बहुत से प्रश्न हैं जिन्हें उठाया जाना चाहिए पर मैंने उन्हें नहीं छुआ ताकि यह आलेख अत्यधिक बोझिल न हो जाये| लेकिन, बहुत से उत्तरित-अनुत्तरित प्रश्नों के होने के बावजूद, इन सभी का एक ही उत्तर है और हमें उसे भारतीय होने के नाते ढूँढना होगा|

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51 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit Dehati के द्वारा
December 15, 2010

प्रिय वाहिद जी , दो शब्द आपके लिए …. निकले थे जमाने की हालात को बदलने , पर बेदर्द ज़माने की ख़यालात न पता था . बहुत ही अच्छी रचना . हार्दिक बधाई ! अच्छा लगा ! http//amitdehati.jagranjunction.com

    वाहिद के द्वारा
    December 16, 2010

    अमित जी! हर घाट का पिया पानी कोई न जम सका, मेरा कारवां था खोज का कभी न थम सका| शुक्रिया वाहिद http://kashiwasi.jagranjunction.com

rajkamal के द्वारा
December 11, 2010

यह मील का पत्थर छू लेने पर हार्दिक बधाई ….

    वाहिद के द्वारा
    December 12, 2010

    ज्येष्ठ बंधु! आपको शत-शत धन्यवाद इस बधाई पर| शुक्रिया |

    Charleigh के द्वारा
    July 12, 2016

    Well I guess I don’t have to spend the weekend finuirgg this one out!

manojgautam के द्वारा
December 11, 2010

आप का आलेख राष्ट्रीय सोच से ओतप्रोत हे हमें सही इतिहास पढ़ाया ही नही गया महात्मा गाँधी की वह जंजीर जिसमें वह अपनी बकरी बांधते थे वह म्यूजियम में दिखाई जाती है किन्तु चन्द्रशेकर आजाद की पिस्तोल और भगत सिंह की फांसी की रस्सी नहीं ब्लागर ऑफ़ दा वीक बनने पैर बंधाई मनोज गौतम

    वाहिद के द्वारा
    December 11, 2010

    आदरणीय गौतम जी| आपके तीक्ष्ण कटाक्ष सीधा दिल पर असर करते हैं| आज़ादी किसी की बपौती नहीं, वो अनेक वीरों और वीरांगनाओं के वर्षों के बलिदान का फल है| आपका बहुत धन्यवाद|

    Justice के द्वारा
    July 12, 2016

    It’s much easier to unrdsetand when you put it that way!

allrounder के द्वारा
December 11, 2010

वाहिद जी, सप्ताह के श्रेष्ट्र ब्लोगर चुने जाने और, एक उत्तम लेख के लिए बधाई !

    वाहिद के द्वारा
    December 11, 2010

    आपका बहुत-बहुत शु़क्रिया हरफ़नमौला जी| :-)

javed ahmed के द्वारा
December 11, 2010

वाहिद साहब मुबारक हो…. अच्छा लिखा है… पर जार्डन के राष्ट्र गीत में इबादत हो रही है? किसकी? प्लीज पढ़ें एक बार…. और उसका मतलब भी समझ लें… आप अच्छा लिखते है पर अच्छा लिखने में कुछ ऐसा ना लिखें जो सच से परे हो… उम्मीद है आप मेरी बात अन्यथा में नहीं लेंगे…. शुक्रिया. عاش المليك عاش المليك سامياً مقامهُ خافقاتٍ في المعالي أعلامه نحن أحرزنا المنى يوم أحييت لنا نهضة تحفزنا تتسامى فوق هامِ الشهب يا مليك العرب لك من خير نبي شرف في النسب حدثت عنه بطون الكتب الشباب الأمجد جندك المجند عزمه لا يخمد فيه من معناك رمز الدأب يا مليك العرب لك من خير نبي شرف في النسب حدثت عنه بطون الكتب دمت نوراً وهدى في البرايا سيدا هانئا ممجدا تحت أعلامك مجد العرب يا مليك العرب لك من خير نبي شرف في النسب حدثت عنه بطون الكتب A-Sha-al Maleek A-Sha-al Maleek Sa-Mi-yan-ma-qa mu-ho Kha-fi-qa-tin fil ma-ali a-lam m-hu Nahnu ahrazna al muna Yawma ahyayta lana Nahdaton tahfizona Tatasama fawqa hami ash-shohobi Ya malika al-arabi Laka min khayri nabi Sharafon fil nasabi Haddathat anhubutuno al-kotobi Ash-shababul amjadu Junduka al-mujannadu Azmuhu la yakhmadu Fehee min ma’naka ramzu al-da’abi Ya malika al-arabi Laka min khayri nabi Sharafon fil nasabi Haddathat anhubutuno al-kotobi Domta nooran wa huda Fil baraya sayyida Hani’an mumajjada Tahta a’lamuka majdol arabi Ya malika al-arabi Laka min khayri nabi Sharafon fil nasabi Haddathat anhubutuno al-kotobi Long live the King! Long live the King! His position is sublime, His banners waving in glory supreme. We achieved our goal, On the day you gave us the mark, A revolution gives us our motivation! Flying over the shoulders of the highest comets. Oh! You king of Arabs, From the best prophet you have.. The honour of dynasty, Talked about in the depths of books! All the youthful men, Are your armed armies His determination never dies out! (translated literally):Getting from your meaning a symbol of well-being! (meaning):Getting from you the manners you have Oh! You king of Arabs, From the best prophet you have.. The honour of dynasty, Talked about in the depths of books! May you stay the light and the guide, A master in being away of all sins and wrong-doing, Living your life happily and well-respected! Under your flying flag rests the glory of all Arabs. Oh! You king of Arabs, From the best prophet you have.. The honour of dynasty, Talked about in the depths of books!

    atharvavedamanoj के द्वारा
    December 11, 2010

    भैया हो तो अल्लाह की ही रही है….वह भी प्रकारांतर से लेकिन भावनात्मक रूप से राजा की ही तो मंगल कामना की गयी है…वह भी दुर्दांत अरबों के रक्षक के रूप में……. Oh! You king of Arabs, From the best prophet you have.. The honour of dynasty, Talked about in the depths of books!… इसका क्या मतलब कई प्रोफेतों में एक बेस्ट प्रोफेट की ओर से हे अरबों के राजा तुझे राजवंश की इज्जत बख्शी गई है….जो वर्णित है पुस्तकों की अतल गहराई में….क्षमा कीजियेगा अंग्रेजी बहुत कम आती है| भैया यह तो बताइए किसकी ओर से?..अल्लाह त आला की ओर से या नबी की ओर से…इन दोनों में महान कौन? अब एकेश्वरवाद तो खुद ही दो भागो में बंट गया? मजारों पर चादर चढाने को आप क्या कहेंगे? छोडिये यह सब बातें आप भी भारतीय मैं भी भारतीय….चलिए भारत भारत गाते हैं…

    वाहिद के द्वारा
    December 11, 2010

    जावेद साहिब, जिस राजा की बात हो रही हो वो भी बिना वतन के राजा नहीं| वोह वतन का ही प्रतिनिधि है| खैर अगर आपकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची तो उसके लिए मुआफ़ी चाहता हूँ| मेरा मकसद वतनपरस्ती है और इसकी क़ीमत पर मुझे कुछ और नहीं चाहिए| आप के द्वारा जोर्डन के राष्ट्र गीत का सम्पूर्ण अर्थ समझ आ गया| शुक्रिया,

    Kamberley के द्वारा
    July 12, 2016

    Mighty useful. Make no mistake, I apatceipre it.

roshni के द्वारा
December 11, 2010

वाहिद जी ब्लॉगर ऑफ़ थे वीक बनने पर बहुत बहुत बधाई …. आपका लेख बहुत अच्छा लगा ……

    वाहिद के द्वारा
    December 11, 2010

    आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद रोशनी जी|

rameshbajpai के द्वारा
December 10, 2010

भाई वाहिद जी ब्लोगर आफ द वीक की मंगल कामनाये , बधाई | आपके परिपक्व विचारो ने सम्मोहित सा कर दिया | बहुत अच्छी पोस्ट | आपके दुसरे lekh par नहीं पहुच पाया कल देखूगा

    वाहिद के द्वारा
    December 10, 2010

    माननीय भ्राता, आपकी मंगलकामनाओं का सदैव शुभेच्छु रहूँगा| आप समय निकाल कर मेरे सभी पोस्ट देखें| आपकी टिप्पणियां मेरे लिए अति महत्वपूर्ण एवं मार्गदर्शक हैं| धन्यवाद|

बी एस पाबला के द्वारा
December 10, 2010

सही प्रश्न उठाये है आपने…. आभार

    Wahid के द्वारा
    December 10, 2010

    आदरणीय पाबला जी| आपकी बेशक़ीमती टिप्पणी के लिए शुक्रगुज़ार हूँ आपका|

    Daveigh के द्वारा
    July 12, 2016

    Good submit. I learn a critical factor very copctimaled upon contrasting blogs everyday. It would be stimulating to understand subject product from distinct writers and exercise somewhat one factor through. I’d have a tendency to employ some while using the information on my own weblog whether or not that you don’t mind. Natually I’ll provide you with link as part of your web web site. Thank anyone for sharing.

suryaprakashtiwadi के द्वारा
December 10, 2010

वाहिद भाई,आपने बहोत ही ज्वलंत सवाल उठाये है.मै भी आपके विचारो से सहमत होते हुए यही कहूँगा की हर किसी को ये नहीं देखना चाहिए की देश ने हमारे लिए क्या किया बल्कि ये सोचना चाहिए की हम देश के लिए क्या कर सकते है.सप्ताह का ब्लोगर चुने जाने पर आपको बधाई.

    Wahid के द्वारा
    December 10, 2010

    सूर्य प्रकाश जी| सबसे पहले आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद| सच कहा आपने कि हमारी सोच स्वकेंद्रित न होकर यह होनी चाहिए कि हम अपने देश को क्या दे सकते हैं| आप लोग यूँ ही पढ़ते रहें तो शायद वर्ष का भी ब्लॉगर बन जाऊं| :-D

    Pait के द्वारा
    July 12, 2016

    Fena değil açıkçası ama daha gideceği çok yol var. Android ku„Ãanl„±cılarÃl± geçsin derim Windows’a o rezil Android’den kurtulmuş olursunuz. iOS kullanıcıları geçerse hayatlarının hatasını yaparlar.

atharvavedamanoj के द्वारा
December 10, 2010

सप्ताह के सर्वाधिक बार देखे गए ब्लॉगर की प्रतिस्ठा पारपत करने पर आपको ढेरों बधाई<जय भारत जय भारती

    Wahid के द्वारा
    December 10, 2010

    आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मनोज जी|

nishamittal के द्वारा
December 10, 2010

बधाई स्वीकार करें सम्मान की

    Wahid के द्वारा
    December 10, 2010

    आपकी बधाई के साथ ही आपके सुझाव और टिप्पणियां भी सर-माथे पर|

    Blondy के द्वारा
    July 12, 2016

    , ‘Hey, look, let’s get together and play on one team …. In all honesty, I was trying to beat those gupe;&#8221.Syoksn Like A True Champion & The Smirk On His Face While Making That Statement Also Spoke Volumes.

kmmishra के द्वारा
December 3, 2010

जाति और धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रवादी सोच के लिये आपका हृदय से आभारी हूं ।

    Wahid के द्वारा
    December 4, 2010

    आभारी तो मुझे होना चाहिए आपका! जो आपने अपने क़ीमती वक्त में मेरे लेख को भी पढ़ा| हार्दिक धन्यवाद आपको|

    Dell के द्वारा
    July 12, 2016

    Has to be a third bike. If you slowly view it, the red bike to the right is not only going slow, but it’s direction is such that there’s no way it could have then veered over to hit like the crasher did. Plus, I think the red bike rider was “geared up.” Looks to me like a rider who was either impatient or overly convinced of his skills (and a moron to boot) who decided he would prove he’s a manly man by &#ot20;sc8o2ing through the opening.” All the gear all the time is great, but dumb riding can top that.

November 30, 2010

वाहिद जी बहुत ऊपर की सोच है आपकी. सच है कि अब पाठ्यक्रम सरकारों के हिसाब से तय होते है. जिन्हें हम बचपन से महान पढ़ते आये हैं , अब ‘अतिवादी’ और ‘आतंकवादी’ बताये जाते हैं. सरकार बदलते ही सरकारी प्रतिष्ठानों में दीवारों पर तस्वीरें बदल जाती हैं. सरकार जिसकी, उसका राष्ट्रपति, उसके राज्यपाल. यानि कि योग्यता की बजाय सरकार अपनी होनी चाहिए. जनता को उसकी जाति और धर्म याद दिलाये जाते हैं, ये बताया जाता है कि तुम्हारी जाति और धर्म कि रक्षा के ठेकेदार हम ही है. अब राजनीती में दो ही कैटेगरी होती हैं-सेकुलर और नान-सेकुलर. आपकी बेबाकी और राष्ट्रवादी सोच को “हैट्स आफ”.

    Wahid के द्वारा
    December 1, 2010

    रतूड़ी जी आपके हैट्स ऑफ को मेरी तरफ से भी हैट्स ऑफ! ये सोच ऊपर की न होकर हमारे आपके बीच की है! ऊपर के लोग तो सिर्फ संसद में बैठ कर नीतियों पर बहस करते हैं और जो हमारे लिए दिखने में अच्छी हों असलियत में  ग़लत हों (और उनके लिए लाभकारी) वह नीतियां तय होनी ही हैं| संवैधानिक पदों पर राजनैतिक लोगों की तैनाती हमारे पवित्र संविधान के मुंह पर एक सरकारी तमाचा हैं| खैर सेकुलर और नान-सेकुलर के विषय में किसी दिन अवश्य चर्चा की जायेगी| आपकी स्पष्टवादी टिप्पणी को शत-शत धन्यवाद|

    Brynell के द्वारा
    July 12, 2016

    Par contre, t’as l’air de penser qu’on veut une femme avec ZÉRO vécu/problèmes/défauts…C’est pas ca du tout qu’on dit, mais tout comme chacun a son propre seuil de tolérance au &l3&;o;qnbspuniaisage »&#82a0;C’est pareil pour le bagage et le reste on l’sait très bien que personne n’est parfait

NIKHIL PANDEY के द्वारा
November 30, 2010

प्रिय वाहिद जी बहुत ही संवेदनशील और गंभी मसला है….. राष्ट्र में मिशनरी स्कूल पहले से ही नाग्रेजी शाशन कालीन विचार को देश के नवांकुरो में भरने में लगे है और रही सही कसार ये सत्ता के मदारी कर रहे है वे देश के इतिहास और उसकी पहचान के साथ खिलवाड़ कर रहे है….आपने सही कहा प्राथमिक स्तर के बच्चों को अयोध्या और गोधरा के दंगों और आपदाओं के बारे में पढ़ाना कहाँ तक सही है, …………… पर वे करेंगे क्योकि उनकी दूर दृष्टि में शक्ति शाली भविष्य नहीं बल्कि केवल अपना वोट बैंक घूमता रहता है….. सही प्रश्न उठाये है आपने…. आपको इसके लिए आभार

    Wahid के द्वारा
    December 1, 2010

    बिलकुल सही सहारा दिया है आपने इस आलेख को निखिल जी! प्रश्न तो हमने और आपने मिल कर उठा दिए हैं पर इनका उत्तर भी हम्हीं लोगों को ढूँढना है! आपके आभार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता हूँ!

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 30, 2010

वाहिद जी, जब तक नेता अपनी जेब भरने में लगे रहेंगे…तब तक सारे मुद्दे बेकार ही है…. http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    Wahid के द्वारा
    December 1, 2010

    आकाश जी! जेबें भरने के लिए हम लोग भी काम करते हैं लेकिन ऐसे नहीं कि अपने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा कर उन्हें भरा जाये| नेता शब्द बहुत ही सुन्दर है मगर आज उसके मायने हमारे देश के राजनीतिज्ञों द्वारा अर्थ के अनर्थ कर दिए गए हैं| आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद|

    Jaylen के द्वारा
    July 12, 2016

    …[Reply] "did anybody expect differently?"Nope. And told you that would be the ruling. "they can spit on the law and there are no cosnoquences."Nepe. They upheld the law. Just as every other court has done to date.

आर.एन. शाही के द्वारा
November 30, 2010

वाहिद जी, जिस तर्क़पूर्ण और साफ़ भाषा शैली में आपने अपनी बातें रखी हैं, उसकी जितनी भी तारीफ़ की जाय, कम ही होगी । मात्र विरोध की राजनीति कर सत्ता हथियाने वाले तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादियों और धर्मवादियों, दोनों को ही अब यह समझ आ जानी चाहिये कि जिन चाबियों को घुमाकर वे शासन करते आए हैं, उनके पेंच अब घिस चले हैं । खिलौनों में जान पड़ चुकी है, और हर कोई समझने लगा है कि इन्हें अब और खेलने देना सबके लिये घातक है । साधुवाद ।

    Wahid के द्वारा
    December 1, 2010

    माननीय शाही जी! आपके द्वारा मेरे लेख पर की गई टिप्पणियों से मैं हर तरह से सहमत हूँ| यदि सिर्फ खिलौने होते तो कोई भी खेल कर फ़ेंक और तोड़ सकता था मगर जिन्हें उन्होंने खिलौना समझा आज उन्हीं के हाथों उनके खिलौना बनने का वक्त अब सन्निकट है! आपके बहुमूल्य विचारों के प्रेषण के लिए आपको भी साधुवाद|

chaatak के द्वारा
November 30, 2010

स्नेही वाहिद जी, आपने जो बाते इस पोस्ट में लिखी हैं उससे भले ही कोई विद्वेष या पूर्वाग्रह के कारण देख कर ही अनदेखा करे परन्तु सत्य अपनी जगह शाश्वत है| कोई भी हिन्दुस्तानी इस विचार से मुंह नहीं मोड़ सकता कि विभाजनकार प्रवृति रखने वाले राजनेताओं और उनके चाटुकारों को अखरने वाले उपरोक्त उदाहरण ही आज की राजनीति की वास्तविक जमीन है| इस छोटे से लेख में जिस तरह आपने दोगले लोगों का नकाब खींचा है वह साहसिक भी है और काबिले तारीफ़ भी| हिन्दुस्तान को आप जैसे कडवे युवाओं की ही जरूरत है मीठा जहर देने वाले दुरंगियों की नहीं| अच्छे पोस्ट पर कोटिशः बधाईयाँ!

    Wahid के द्वारा
    November 30, 2010

    चातक जी! जो कड़वाहट आपको द्रष्ट हुई है वही शायद किसी दिन कोई मीठा फल दे सकेगी| आपके प्रोत्साहन ने ज़ाहिराना तौर पर मेरे लेखन की हौसलाअफ़ज़ाई की है जिसके लिए आपका ऋणी हूँ|

    Rangler के द्वारा
    July 12, 2016

    Fantastic site you have here but I was wanting to know if you knew of any community forums that cover the same topics discussed in this article? I’d really love to be a part of group where I can get feed-back from other knlgoedweable individuals that share the same interest. If you have any suggestions, please let me know. Appreciate it!

abodhbaalak के द्वारा
November 30, 2010

वाहिद जी बहुत ही ज्ञानवर्धक लेख, और साथ में सार्थक भी सुन्दर लेख के लिए बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Wahid के द्वारा
    November 30, 2010

    इसे ज्ञानवर्धक क्या कहें.. जो हो रहा है वो सब बेपर्दा है हमारी आँखों के सामने| हम ही हैं जो चुपचाप लाचार दर्शक बने बैठे हैं| बधाई के लिए शुक्रिया|

rkpandey के द्वारा
November 30, 2010

वाहिद भाई, आपने बहुत ही गंभीर और सार्थक मुद्दा उठाया है. तुष्टीकरण की नीति केवल वोट बैंक मजबूत करने के लिए है. इसके लिए देश में समुदायों के बीच कितनी नफरत की सृष्टि कर रहे हैं दुष्ट राजनीतिज्ञ ये खेद का विषय़ है. आजादी के आरंभिक वर्षों से ही मुस्लिमों के हित नाम पर उनका बड़ा अहित किया स्वार्थी राजनीति ने और आज तक करते आ रहे हैं. हिन्दू-मुस्लिम के बीच बड़ी दीवार खड़ी कर ये सत्तासीन होते रहे और देश मूक हो देखता रहा. बधाई आपको राष्ट्रहित में बेहतर आलेख की रचना के लिए.

    Wahid के द्वारा
    November 30, 2010

    आदरणीय पाण्डेय जी! आपने जो राजनीति और राजनीतिज्ञों की बखिया उधेड़ी है अपनी छोटी सी टिपण्णी में उसे अनेकों साधुवाद| जो हो रहा है उसे देख कर लिखे बग़ैर रहा नहीं गया|

nishamittal के द्वारा
November 30, 2010

राष्ट्रीयता से ओतप्रोत आपका लेख पढकर बहुत अच्छा लगा.हमारे देश में कोई भी अच्छा काम न हो पाने का कारण ही “मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना “वाली बात तो है ही उससे बड़ी बात है कि राष्ट्र की दृष्टि से नहीं अपनी संकुचित दृष्टि सेदेखा जाता है.आवश्यकता हिया व्यापक दृष्टिकोण की जिसके लिए पूर्वाग्रह के चश्मे उत्तरने होंगें.अछे लेख पर बधाई.

    Wahid के द्वारा
    November 30, 2010

    बिलकुल बजा फ़रमाया आपने निशा जी| आज हमें एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है| सभी प्रकार के पूर्वाग्रहों और दुराग्रहों को अपनी सोच से निकाल फेंकना होगा|आपके बहुमूल्य विचारों के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद|


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