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दुःखद घटना

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आज सायंकाल क़रीबन ६.३५ बजे मेरे घर से सिर्फ़ तीन किलोमीटर दूर धमाका हुआ वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर| अनेकों लोग घायल हुए हैं.. और अनुमानतः दो-एक लोग हत भी हुए हैं| ये दहशत की आग इस यकजहती के चमन को जलाना चाहती है मगर कामयाब नहीं होगी| एक बार फिर ७ मार्च, मंगलवार याद आ गया आज ७ दिसंबर, मंगलवार को| जब मुझसे सिर्फ़ ५०० मी० की दूरी थी उस धमाके की संकटमोचन मंदिर के प्रांगण में| मगर हमारे हौसले आज भी वही हैं| जो चिर है, निरंतर है उसे रोकना किसके बस का है|
चैनो अमन की दुआ के साथ,
वाहिद
http://kashiwasi.jagranjunction.com

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
December 9, 2010

वाहिद जी ….दुरी कोई मायने नहीं रखती …बस एहसास होने चाहिए …. आपके एहसासों और ख्यालो को सलाम … जय हिंद

    Wahid के द्वारा
    December 9, 2010

    आपके सलाम और हौसलाअफज़ाई के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया |

    Steffie के द्वारा
    July 12, 2016

    Ok.A polícia municipal bloqueou carros que estavam bem estacionados.Como não concebo tal acção, acho-a perfeitamente incrível, daí a minha esa.pefacçãouMts afinal qual foi a justificação apresentada????Eu que eu não saía dali enquanto não me dissessem a razão e se não me dissessem chamava o PSP ou a Polícia Militar ou a Judiciária, o que me lembrasse!

atharvavedamanoj के द्वारा
December 8, 2010

मित्र आप बनारस के ही हो…यह जानकार मेरा ह्रदय आह्लादित हुआ…शायद आप मदनपुरा में रहते हो? आपके लेखों के विषय में देर से परिचित हुआ|शायद आपने लिखना ही देर से प्रारंभ किया…कोई बात नहीं मैंने आपके लेखों को देखते ही यह समझ लिया की इस तरह का विचार कोई बनारस का ही मुस्लमान रख सकता है ….मित्र इस धमाके ने हमारे ह्रदय को झकझोर कर रख दिया है…..देखना है जख्म कुरेदने वाले नेता गन कौन सा मरहम लेकर आते हैं….वाहिद भाई ….बनारस की ही किसी मुस्लिम बहन ने उर्दू में हनुमान चालीसा लिखा है ….आपसे इल्तजा है किसी ब्लॉग में उस आदरणीय बहन का भी जिक्र कर दें….जय भारत,जय भारती

    Wahid के द्वारा
    December 8, 2010

    मनोज जी| हूँ तो मैं बनारस का ही और इसीलिए एक बनारसी हूँ, हिन्दुस्तानी हूँ| मेरे लिए मज़हब की कोई अहमियत नहीं| वास्तविकता तो यह है कि मैं जन्म से एक हिंदू हूँ और उर्दू तखल्लुस \’वाहिद\’ (जिसका अर्थ होता है – इकलौता, अद्वितीय, अनोखा) के नाम से लिखता हूँ| मगर मेरी नज़र में हिंदुस्तान में रहने वाला हर एक शख्स हिंदू है क्योंकि वो हिन्दुस्तानी है| देशप्रेम से ऊपर कोई मज़हब नहीं है मेरे लिए| नेता जानते हैं के उनके मरहम किसी काम के नहीं मगर वो आएंगे ज़रूर, यहाँ हम सब भी तैयार हैं| जिन मोहतरमा की बात आपने की है, मैं उनसे ज़ाती तौर पर मिल चुका हूँ| कभी अवसर प्राप्त होने पर उनका भी ज़िक्र अवश्य करूँगा| जय हिंद

    Taron के द्वारा
    July 12, 2016

    Pour rester dans le vif du sujet, en allemand « passer un sapin » se dit « hinters Licht führen », littéralement « conduire derrière la luo¨;ire &raqumÃ.

nishamittal के द्वारा
December 8, 2010

आतंकवाद रूपी पाप व पापियों का अंत अवश्य होगा.कायरता अधिक नहीं टिक सकती परन्तु हमारा सशक्त होना आवश्यक है वाहिद जी.

    Wahid के द्वारा
    December 8, 2010

    बिलकुल सही कहा आपने निशा जी| कब तक खै़र मनाएगी, बकरे की अम्मा, आज नहीं तो अगला जुम्मा| बनारस ने कभी क़दम पीछे नहीं हटाए हम तब भी मज़बूती के साथ खड़े थे और आज भी जमे हुए हैं|

    Bear के द्वारा
    July 12, 2016

    I will right away clutch your rss feed as I can’t find your email subitrspcion link or e-newsletter service. Do you’ve any? Kindly allow me recognize so that I may subscribe. Thanks.


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