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क्यूँ हो गया??

Posted On: 20 Dec, 2010 Others में

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ये तो सपना था सज़ा क्यूँ हो गया?
जो यार था वो बेवफ़ा क्यूँ हो गया?

पूछिए दीवानों से बताएँगे वो
दर्द ही ख़ुद ही दवा क्यूँ हो गया?

जिसको बनने में लग गई मुद्दत
एक ही पल में तबाह क्यूँ हो गया?

अश्क़ जिसके थे मेरे मोती
आज मुझसे ही ख़फ़ा क्यूँ हो गया?

निकला जो ‘वाहिद’ दिल से आह का मिसरा
वो ख़ुदा के पास दुआ क्यूँ हो गया?

हम तो इसी बस्ती के वाशिंदे थे
आज हर चेहरा नया क्यूँ हो गया?

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
January 25, 2011

वाहिद जी बढ़िया ग़ज़ल

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    January 25, 2011

    आपका बहुत शुक्रिया शैलेश जी! आप तो मुझसे ऊंचे दर्ज़े के कवि हैं.. हौसलाअफज़ाई का शुक्रिया,

abodhbaalak के द्वारा
December 21, 2010

वाहिद जी सुन्दर ग़ज़ल के लिए बंधाई हो, बेहतरीन गज़लें होती हैं आपकी http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    वाहिद के द्वारा
    December 21, 2010

    आपका बहुत शुक्रिया अबोध जी| यूँ ही पढ़ते रहें|

Arunesh Mishra के द्वारा
December 20, 2010

क्या बात है वाहिद जी. दर्दे बयां काबिले तारीफ है.

    वाहिद के द्वारा
    December 20, 2010

    ख़ुशामदीद अरुणेश जी

    Darence के द्वारा
    July 12, 2016

    Simply want to say your article is as surprising. The clearness in your post is just spectacular and i can assume yor&u8217;#e an expert on this subject. Well with your permission let me to grab your feed to keep up to date with forthcoming post. Thanks a million and please keep up the rewarding work.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 20, 2010

ये तो सपना था सज़ा क्यूँ हो गया? जो यार था वो बेवफ़ा क्यूँ हो गया? पूछिए दीवानों से बताएँगे वो दर्द ही ख़ुद ही दवा क्यूँ हो गया । हर बार की तरह एक ओर सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई……

    वाहिद के द्वारा
    December 20, 2010

    बंधुवर पीयूष जी। आपकी बधाई का शुक्रिया

NIKHIL PANDEY के द्वारा
December 20, 2010

वाहिद भाई बढ़िया गजल है …लिखते रहिये…

    वाहिद के द्वारा
    December 20, 2010

    आपका बहुत शुक्रिया निखिल जी|

वाहिद के द्वारा
December 20, 2010

राजकमल जी! दुर्घटनावश त्रुटियाँ दूर करते वक़्त पिछली पोस्ट के साथ ही आपकी टिप्पणी भी मिट गई| कृपया उसे दोबारा पोस्ट करने की कृपा करें, अन्यथा यह पोस्ट अधूरी रह जायेगी|

    December 30, 2010

    वाहिद मिट गया है जो लिखा था किसी ने स्याही से, गम ना करो उसका, हम तो दिलों पे लिखते हैं.

    वाहिद के द्वारा
    December 31, 2010

    फिर मुहब्बत से गले मिलने का मौसम आया, फूल कागज के खिले कांच के बाज़ू आये; बस गई है मेरे एहसास में ये कैसी महक, कोई खुसबू मैं लगाऊं तेरी खुश्बू आये; उसने छूकर मुझे पत्थर से इंसान किया, मुद्दतों बाद मेरी आँखों में आंसू आये| ‘वाहिद’ और ‘राजकमल’ की दो बातें हुईं यहाँ, बीच में खेल खेलने ये “रतूड़ी” आये| : -D

    Roxie के द्वारा
    July 12, 2016

    It is smart for Google to aim for the cream of the crop of AWS customers first. It both makes an statement and has a chance to hurt them in a high-value customer segment. However, long-term success will require Google building a fulldfle-ged ecosystem which is much harder to do. We live in interesting times :)


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