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बम-बम लहरी:महाशिवरात्रि पर विशेष

Posted On: 2 Mar, 2011 में

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बम-बम लहरी,बम-बम लहरी,
तू ही नाशक,तू ही प्रहरी;


कैलाश के उत्तुंग शिखर,
तुम खिले पुष्प हम हुए भ्रमर,
तुम पर ही अब दृष्टि ठहरी;
बम-बम लहरी…


यह तेरा ही प्रताप है,
मिट गए सब विलाप हैं,
तुझसे भक्ति हुई गहरी…
बम-बम लहरी…

तू ही था पहले तू ही बाद,
गूंजा था जब वह शंखनाद,
ताण्डव से सारी सृष्टि सिहरी;
बम-बम लहरी…


तू परमब्रह्म, तू रत्नाकर,

तेरी यह प्रेम सुधा पाकर,

धन्य हुई काशी नगरी;

बम-बम लहरी

काशी का कंकर शंकर है,

क्रोधित तो रूद्र भयंकर है,

दस दिश उसकी आभा बिखरी;

बम-बम लहरी

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53 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Candid के द्वारा
July 12, 2016

We need a lot more insgthis like this!

shashibhushan1959 के द्वारा
February 26, 2012

आदरणीय वाहिद जी, सादर ! अद्भुत ! ये कहाँ आ गए हम !!!! ये तो अच्छा हुआ कि आज मैं टहलते-टहलते आदरणीय प्रदीप जी कि पोस्ट पर पहुचा और आपका ये लिंक मिला ! अगर ये भी जे जे मंच ही है तो वहाँ क्यों नहीं दिखता ? बताइये ! मैं एक अच्छी रचना से अभी तक वंचित रहा ! (ये चित्र ऐसा धुंधला सा क्यों ?) बहुत अच्छी रचना, वाहिद जी. हार्दिक शुभकामना !

Santosh Kumar के द्वारा
February 20, 2012

भाई जी ,.सादर नमस्ते तांडव करते शिव और भक्ति में लहराती काशीवासी की अद्भुत रचना ,.शब्द नहीं हैं ,.. बम बम लहरी..बम बम लहरी

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 20, 2012

    प्रिय संतोष भाई, बम-बम लहरी-बम-बम लहरी… आपको भी।

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 19, 2012

प्रिय वाहिद भाई ….. सप्रेम आदाब अर्ज है ! जय हो भोले शिव शंकर की जय हो त्रिपुरारी उमापति जी की आपके इस लेख को देख कर पुरानी यादे ताजा हो उठी ….. कल को शिवरात्री है तो जाहिर सी बात है की प्रसाद बंटेगा भी और आप उसको ग्रहण भी करोगे ….. भांग की मस्ती भरी तरंगों में झूलते हुए इस बार भी दो पंक्तिया इस भक्तिमयी रचना में जुड़ जाए तो क्या बात हो ! जय हो नटराज त्रिपुरारी + कंसारी + वरमालाधारी जी की जय हो जयमाला + बनमाला + मुण्डमाला धारी जी की :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 20, 2012

    प्रिय राजकमल भाई, सादर, इस कविता को पुनर्प्रकाशित करते हुए मेरी भी पुरानी यादें ताज़ा हो गई थीं। आज तो शिवप्रसाद घर घर में और हर मंदिर, नुक्कड़, चौराहे पर बंटेगा। दो पंक्तियों के लिए कभी एक मिनट भी नहीं लगता और कभी कई दिन हो जाते हैं कुछ सूझता ही नहीं। कुछ कविताएँ तो सालों से इंतज़ार में बैठी हैं कि मुखड़े से आगे बढ़ें मगर ऐसा कोई संयोग ही नहीं बन पा रहा। अपनी टिप्पणी रुपी प्रेमभावना से मुझे पुनः सरोबार करने के लिए आपका कोटिशः आभार,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 25, 2012

    प्रिय राजकमल भाई, आपके कथनानुसार अंत में कुछ नई पंक्तियाँ जोड़ दी हैं। आशा है आपको पसंद आयेंगी। साभार,

March 4, 2011

“हर-हर महादेव शिव शंभू, भोले तेरी कृपा गहरी, काशी में भी तेरा वास है, ऋषिकेश* भी तेरी नगरी.” (ऋषिकेश*- वीरभद्र)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 20, 2012

    जय हो ऽऽऽऽ बाबा विश्वनाथ की… त्रिपुरारी ख़बर लो हमारी…

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 4, 2011

आदरणीय वाहिद भाई, किंचित कारणों से इस पोस्ट पर देर से नज़र पड़ी . बहुत ही सुन्दर है आपकी रचना .

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 4, 2011

    दीपक जी, देर आयद दुरुस्त आयद| सराहना के लिए धन्यवाद|

Nikhil के द्वारा
March 4, 2011

बहुत खूब वाहिद भाई. बम-बम लाहिड़ी!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 4, 2011

    आपको भी बम-बम भोले निखिल भाई| आनंद लें|

    Brandi के द्वारा
    July 12, 2016

    I love your bravery with just attacking projects. You are simply impressive!I wonder if maybe, due to its position next to an iter-217;s-supposed8to-be-mor&-clutte#y desk area, the shelves would look better with just books and bookends on it. I think that’s probably what I would do, but then again, I’m too chicken and lazy to build Ace shelves.

March 3, 2011

बम लहरी बम-बम लहरी, जल्दी आयेंगे भोले हम तेरी नगरी……. वाहिद भाई गागर में सागर है ये रचना.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 4, 2011

    भईया, हमारी गागर में भी सागर कर देते आप तो कितना आनंदित हो जाते हम!! बम-बम लहरी….। …..वाह जी वाह वाह…….।।

chaatak के द्वारा
March 3, 2011

वाहिद जी, महाशिवरात्रि के इस पर्व पर आपकी रचना ने तो मानो जागरण मंच को ही शिवमय कर दिया है| हर हर महादेव!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    चातक भाई, काशीवासी होने का तात्पर्य ही क्या रह जाता अगर इस ख़ास दिन भी भोले बाबा को याद नहीं किया होता| बम बम भोलेऍ

allrounder के द्वारा
March 3, 2011

जय शिव शंकर की वाहिद भाई, बहुत अच्छी महिमा शिव की बम – बम लहरी…. बम बम लहरी ….!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    सचिन भाई, आपको भी बम-बम लहरी…!! आभार,

    Cassandra के द्वारा
    July 12, 2016

    Haeallujlh! I needed this-you’re my savior.

vinitashukla के द्वारा
March 3, 2011

भोलेनाथ को समर्पित भक्तिपूर्ण और भावप्रणव रचना. सुन्दर भाव्यभ्यक्ति.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    विनीता जी, बाबा का महात्म्य भक्तजनों को भावनाओं के अथाह सागर में डुबो देता है जहाँ डूब कर भी हम पार लग जाते हैं|

Ramesh bajpai के द्वारा
March 3, 2011

प्रिय वाहिद जी भगवन आशुतोष की भक्ति से ओत प्रोत इस रचना ने भावो की अलख ही जगा दी | बाबा के चरणों में मेरा शत शत बंदन | इस भक्ति सागर में गोते लगवाने का बहुत बहुत शुक्रिया |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    आदरणीय बाजपेई जी, भोले बाबा की महिमा है ही इतनी अपरम्पार कि भक्तगण धन्य हो जाते हैं| साभार,

    Keiffer के द्वारा
    July 12, 2016

    Ohmygod, this is hilarious! I mean, it’s not funny that it hurts [thanks for asking for the novocain -- i know that was jsut to spare my feelings]. But your telling of it is truly hiunTiols.rhaak god you’re such a slow learner you didn’t learn Dad’s other trick, the one where you stick your hand BACK into a post hole where a copperhead is waiting to bite it AGAIN.I feel there’s a moral in here somewhere. Don’t you have dental insurance?

baijnathpandey के द्वारा
March 2, 2011

आदरणीय वाहिद जी ………भोलेनाथ की कृपा आपपर बनी रहे ……….भावपूर्ण रचना

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    प्रिय बैजनाथ जी, हमारी भी यही तमन्ना है कि महादेव नीलकंठ की आप पर नज़रे इनायत बनी रहे| बिना भाव हुए ऐसी रचनाएँ मुमकिन ही नहीं हो सकतीं| सस्नेह,

sdvajpayee के द्वारा
March 2, 2011

  हर हर महादेव !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    आदरणीय वाजपेयी जी, शिव जी तो स्वयं सर्वस्व प्रतिक्षण, ब्रह्माण्ड के कण-कण में विराजमान हैं| उनके स्नेह-सिंचन का ही फल है जो आज ये रचना सिर्फ़ कुछ मिनटों में साकार हो गयी|आपको भी शिव-शिव!!

    Rose के द्वारा
    July 12, 2016

    [39] si&#8Itma,217;s because we lost. And remember, taxation for these bennies is a forced exaction; I have no choice about paying for them. And if I am going to be paying for them anyway, that means I am a participant (even if I never wanted to be one). So, it is only natural to seek to use them if we qualify. Is it my fault that the bar is so low?

Preeti Mishra के द्वारा
March 2, 2011

वाह वाहिदजी सही मायने में आप काशीवासी हैं. आज शिवरात्री के अवसर पर आपने शिवभक्ति की एक अच्छी कविता लिखी है. साथ ही साथ आपने शिवजी के सुंदर स्वरुप के दर्शन करवाकर बहुत सा सवाब (पुण्य) कमा लिया है. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    प्रीती जी, एक कहावत है हमारे यहाँ कि काशी में तुम क्या बसे जो बसे औरंगाबाद..| तो शिव जिनका अर्थ ही कल्याणकारी है का स्मरण करके पुण्यलाभ तो होना तय है ही| प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त करना चाहेंगे|

rajkamal के द्वारा
March 2, 2011

प्रिय वाहिद भाई …….आदाब ! ऐसा लगता है की आपने शिवजी का “प्रसाद” ग्रहण नही किया है ….. अगर करते तों कदापि ऐसी रचना (ताजातरीन ) पेश नही कर पाते …… और जहाँ तक दूसरों के द्वारा दर्शन करने की बात की गई है , मैं समझता हूँ की दर्शन ‘इन आँखो’ से नहीं बल्कि ‘उन आँखों’ से किये जाते है …… जोकि हर किसी के पास नही होती (वैसे मेरे पास भी नही है अभीतक ) आपने तस्वीर लगाने के बारे में बताना था कुछ ,मैं आपके इंतज़ार में हूँ ….. धन्यवाद

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    भ्राता श्री, आपने बिलकुल सही पहचाना और यह सूचक है दिल मिल जाने का| आपको मेल कर दी है कृपया सारी बातें लिख दें जवाब में| आपने तस्वीर पर कुछ कहना था तो हमने उसे हटा लिया है…आपकी दृष्टि बहुत पारखी है मेरे विचार से| और हाँ दो-तीन पंक्तियाँ बाद में जोड़ी हैं जो बाबा के “प्रसाद” को ग्रहण करने के बाद ही सूझ सकीं|

    March 3, 2011

    भाई लोगों मुझे तो नहीं लगता की बिना भोले के प्रसाद के ऐसी भक्तिमय रचना निकल सकती है. और वो काशीवासी ही क्या जो बाबा का प्रसाद ना ग्रहण करे शिवरात्री पर.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 4, 2011

    जो तुने कह दिया , न जाने क्या हुआ.. हमारी ज़िंदगी ने कुछ तो कहा……. मन चंगा तो कठौती में गंगा बड़े भाईओं..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 4, 2011

    भ्राता श्री, एक मेल और भेजी है आपको जो आपके लिए सहायक साबित हो शायद| शीघ्र सूचित करें ताकि आगे के बारे में कुछ किया जा सके| साभार,

    March 4, 2011

    वाहिद भैया, अगर फोटो का साइज थोडा कम कर लोगे तो क्लैरिटी आ जायेगी……. बम लहरी बम-बम लहरी, वाहिद तुम पे भोले की कृपा ठहरी.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 4, 2011

    भईया, कॉपीराइट का मुआमला था इसलिए चित्र को धुंधला कर दिया है…. और कोई बात नहीं..आपके लिए अलग से भेज देंगे| बम बम लहरी, प्रेम स्नेह सरिता लहरी|

    Kyanna के द्वारा
    July 12, 2016

    Maravilhosa essa maquiagem Camila.Suas maquiagens são perfeitas, tenho acompanhado bastante você no youtube, e adorei a ideia do blog.Não vou perder nenhum post.Grande Beai.,Larissio[]Camjla Coelho Respondeu:May 3rd, 2011 em 7:51 pm, OUnn, muito obrigada pelo carinho amore!!! Sera um prazer eceber sua visita por aqui =) Bjinhoss []

vandanapushpender के द्वारा
March 2, 2011

वाहिद काशिवाशी जी, साक्षात शिव दर्शन करवाने के लिए बहुत धन्यवाद, छोटी मगर भक्तिमई भावपूर्ण रचना के लिए बधाई |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    वंदना जी, मेरी भक्तिमयी प्रस्तुति आपको यहाँ तक ले आ सकी तो लिखना सफल हुआ| दो पंक्तियाँ और जोड़ी हैं कृपया देख लें|

    vandanapushpender के द्वारा
    March 3, 2011

    बहुत बहुत बधाई वाहिद काशिवाशी जी, अत्यंत भावपूर्ण रचना है जिसने पुनः आपके ब्लॉग पर आने को विवश कर दिया | मुबारकबाद कुबूल करें |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    वंदना जी, आपका यह स्नेह सदैव बरकारार रहे यही भोलेनाथ से दुआ है|  पुनश्चः धन्यवाद आपको,

rachna varma के द्वारा
March 2, 2011

ओह , महाशिवरात्रि पर साक्षात् शिव का दर्शन अति सुन्दर !

nishamittal के द्वारा
March 2, 2011

काशीवासी जी,कशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए आभार.कृपया जब भी समय अवसर हो हमारा नमन भी पहुंचा दें.जैसे एक भजन के अनुसार रामजी को सन्देश हनुमान जी के माध्यम से भिजवाया जाता है.धन्यवाद अग्रिम.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    आदरणीया निशा जी, काशी तो भोले विश्वेश्वर की परम प्रिय स्थली है जो माँ पार्वती को सौत जैसी लगती है और फिर भी सगी बहन जैसी प्यारी है|काशी की ऐतिहासिक जानकारी दोहराने का समय शीघ्र ही हो चला है| साभार,

आर.एन. शाही के द्वारा
March 2, 2011

वाहिद जी, बाबा विश्वनाथ के चरणों में मेरा वन्दन और अभिषेक अवश्य अर्पित करने का कष्ट करेंगे । अच्छी रचना … बधाई ।

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    आदरणीय शाही जी, आपने तो मोह पाश में बाँध ही लिया है फिर भी कहने के लिए कोटिशः आभार. लंकावासी रावण!

rajeev dubey के द्वारा
March 2, 2011

कब से इंतज़ार था… आज तो काशीवासी जरूर दर्शन देंगे… इस सुन्दर से बम-बम पर बधाई हो !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 3, 2011

    आदरणीय राजीव जी, दो पंक्तियाँ और जोड़ी हैं जो उस वक़्त संभव नहीं थीं|भोले भंडारी ने सुन ली हमारी..!!


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