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आख़िरी मुलाक़ात!!!!

Posted On: 24 Mar, 2011 में

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—————————————————————–

आख़िरी मुलाक़ात है ये आख़िरी कलाम,
चल दिए सफ़र पर लेकर तेरा ही नाम;


एक वक़्त था लम्हों में जो भूल नहीं सकता,
एक उम्र गुज़ारी थी लेकर सुबह से शाम;


मालिक से दुआ की थी क़ुबूल न हो पायी,
अहले जहां में अब है मेरा भला क्या काम;


न हो सका मुयस्सर मुझको कभी क़रार,
चलता रहा राहों में अपने जिगर को थाम;


शिकवा नहीं किसी से, किससे करूँ गिला,
जो आगाज़े दिल को मेरे ना मिला अंजाम;


अपनी ज़मीं, अपनी हवा, अपना है आसमां,
अपना वतन है यारों, उनका नहीं ग़ुलाम;


कैसी है ये ज़ुंबिश, उठते नहीं क़दम,
जज़्बाए दिल के होते, नहीं रुक सकेगा काम;


लेता हूँ विदा यारों, नहीं अलविदा कहा है,
बीते हैं दिन भी कितने, कर लूं ज़रा आराम;


ऐ’वाहिदे नादां’ इसे क्यूँ भूलता है तू,
तेरा अदब, तेरी अदा, तेरा जो है मुक़ाम;


अब वक़्त हो चला है, मंज़िल को छोड़ने का,
सफ़रे तवील ही है, मुकम्मल तेरा क़याम;

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=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*=*

अहले जहां = दुनिया, मुयस्सर = उपलब्ध, ज़ुम्बिश = कंपन, अदब = साहित्य,

सफ़रे तवील = लंबा सफ़र, ज़िंदगी, मुकम्मल = पूर्ण, क़याम = पड़ाव

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424 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lefty के द्वारा
July 11, 2016

Thanks for spending time on the computer (wiirtng) so others don’t have to.

syeds के द्वारा
May 16, 2011

वाहिद भाई, बेहद खूबसूरत रचना,काफी दिनों से आपकी कोई पोस्ट मंच पर नहीं आई….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    May 17, 2011

    सैयद भाई, बस कुछ मसरूफ़ियत कुछ इस क़दर है के लिखना मुमकिन नहीं हो रहा है| फिर भी आप सब का प्यार कमेन्ट दिलवाता ही रहता है मुझ से| देखिये कब वापसी हो पाती है..| शुक्रिया आपका..

neelamsingh के द्वारा
March 27, 2011

वाहिद भाई ,आप फिर कभी मत कहियेगा कि- अहले जहाँ में अब है मेरा भला क्या काम | काशी शिव की नगरी है जिन्होंने गरल -पान किया था और आप उसी काशी के हैं ये कभी मत भूलियेगा | आप के लिए ये कुछ पंक्तियाँ – \’तूफाँ की क्या मजाल जो कश्ती को डुबो दे ,लहरों से जूझने की आदत सी पड़ गयी है |` मेरे भाई ! अहले वतन को अभी आप से बहुत काम है ,अभी तो मंजिल की शुरुआत है अभी लम्बा फासला तय करना है |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    नीलम जी, जीवन में कुछ ऐसे भी पल होते हैं जब मनोदशा भाव के रूप में व्यक्त हो जाया करती है। आप भी मेरी ही तरह काशी से गहरे जुड़ी हुई हैं। इधर नितांत व्यक्तिगत और कुछेक व्यवसायगत विवशताओं के चलते अपने इस परम प्रिय मंच से विदा होना पड़ रहा है पर लौटना ज़रूर है ये तो तय है मगर कब ये नहीं जानता| आपके अपनत्व से भरे इस सन्देश ने सीधे हृदय में प्रवेश किया है देखिये वो नीली छतरी वाला कब अपनी नज़रे करम फरमाता है और मैं पुनः आप लोगों के समक्ष हाज़िरी लगता हूँ| आपके ब्लॉग पर आता रहूँगा ये वादा है मेरा। धन्यवाद आपका उत्साहवर्धन के लिए,

    Karik के द्वारा
    July 12, 2016

    pepper / Just have to say love listening to and having this beautiful song on my Ipod. Such a catchy tune with Dai#1&v82d7;s stellar vocals. Thank you again for the new and great music David and team, you’re the best. Really looking forward to the new album too! #blessedfans

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 26, 2011

प्रिय वाहिद भाई ….आदाब ! आपकी वापसी बहुत ही सुखद है हम सभी के लिए एक ताज़ा हवा के झोंके के समान ….. हम आखरी बार भी पहली बार की ही तरह मिला करते है इसलिए तो जुदा हो करके भी फिर से मिला करते है …. धन्यवाद व् आभार

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    लगता है आपकी कमेन्ट भी नहीं आ रही थी इसलिए दो बार दे दिया आपने।

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 26, 2011

प्रिय वाहिद भाई ….आदाब ! आपकी वापसी बहुत ही सुखद है हम सभी के लिए एक ताज़ा हवा के झोंके के समान ….. हम आखरी बार भी पहली बार की ही तरह मिलते है इसलिए तो जुदा हो करके भी फिर से मिला करते है …. धन्यवाद व् आभार

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    भ्राता श्री, ये आपही का प्रेम था जो मुझे खींच लाया देखिये कब लौटना हो पाता है। शुक्रिया आपका,

    Anjii के द्वारा
    July 12, 2016

    Hey,Great informative article!Earth institute conducting Division 48 The Society for the Study of Peace, Conflict and Violence Seeks Nominations for students is good.I wish the students who are nominating for Division 48 and future en.hvaourdteanks for providing good information.

abodhbaalak के द्वारा
March 26, 2011

आप तो महाराज ग़ज़ल किंग है, जगजीत सिंह हैं, …. तारीफ के लिए और कुछ लिखों क्या? http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    नहीं भाई साहब इतनी ही तारीफ़ बहुत है मेरे लिए। नाहक ही झाड़ पर चढ़ा रहे हो आप।

    abodhbaalak के द्वारा
    April 19, 2011

    वैसे श्रीमान जी, मेरे से कोई गुस्ताखी हो गयी है, नज़र नहीं आपके कमेंट्स आजकल मेरी पोस्ट पर? वैसे तो मेरा स्तर क्या है मुझे पता ही है पर पहले आप ……….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    April 25, 2011

    अबोध जी, ऐसी कोई बात नहीं है मेरे भाई| आप ग़लत न समझिए मुझे| बहुत ही व्यस्त हूँ इसीलिए आपको जवाब नहीं दे पा रहा| देखिये क्या होता है निकट भविष्य में| इस स्नेह के लिए आभार,

आर.एन. शाही के द्वारा
March 25, 2011

राहों में छूट जाते हैं ऐसे कई कलाम, रहबर के लिये ज़र्रा-ए-हरशू नया मुक़ाम ।। है किससे क्या ग़िला, किया था शिक़वा ना कभी, है किसकी क्या खता, करूं बेबात जो पयाम ॥ लिखते हैं ज़मीं पर तो कभी आसमान पर, बेपर की उड़ाने का मज़ा ले लो सुबहो शाम ॥ यूं तो कवित्त देखे हैं दुनिया के नक्श पर, पर शाही जी की तुकबन्दी सा नहीं कोई निज़ाम ॥ … कैसी रही ज़नाब, ये आफ़्टर होली !

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 25, 2011

श्री वाहिद जी, आपके पास शब्दों का खजाना है..आपके शब्दों में …आपकी रचना में बहुत ही बड़ा आकर्षण है .. मुझे बहुत-बहुत पसंद आई आपकी ये रचना….. आकाश तिवारी

    आर.एन. शाही के द्वारा
    March 25, 2011

    मैंने बड़ी मेहनत से एक तुकबन्दी लिखी, जो फ़िर यहां बहुत पहले की तरह पोस्ट नहीं हो पाई । क्यों ?

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    शुक्रिया आकाश भाई, आपको ये ग़ज़ल पसंद आई जानकर मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई।

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    गुरुवर पोस्ट हो गयी है।

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 25, 2011

ऐ’वाहिदे नादां’ इसे क्यूँ भूलता है तू, तेरा अदब, तेरी अदा, तेरा जो है मुक़ाम; प्रिय श्री वाहिद जी सारे गिले शिकवो के बाद बी अदब अदा का यह जादू सीधे वही पहुचा है ……..दिल के पास | बधाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    पुनश्चः धन्यवाद आपका।

    Mavrick के द्वारा
    July 12, 2016

    I loved as much as you’ll receive carried out right here. The sketch is tasteful, your authored subject matter stylish. nonetheless, you command get got an edginess over that you wish be delivering the following. unwell uniasetqonubly come more formerly again as exactly the same nearly a lot often inside case you shield this increase.

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 25, 2011

ऐ’वाहिदे नादां’ इसे क्यूँ भूलता है तू, तेरा अदब, तेरी अदा, तेरा जो है मुक़ाम; प्रिय श्री वाहिद जी रौनक रवानगी राहत रहमत अदा व अदब सब कुछ मन को छूता रहा छूता रहा बहुत बहुत बधाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    आदरणीय बाजपेयी जी, आपकी काव्यात्मक प्रतिक्रिया ने हृदय गदगद कर दिया । धन्यवाद आपका,

    Lola के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m a super fan that I have always been fond of anything green tea flavored. May it be cookies, biscuits, cakes, sweets and so with ice cream. This is aboesutlly one of the recipe I can’t miss, have to put it under my ‘must try’ list. Drool !

alkargupta1 के द्वारा
March 25, 2011

वाहिद जी , इस पोस्ट पर टिप्पणी नहीं जा रही है !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    आप चिंता न करें टिप्पणी थोड़ी देर में आ जायेगी।

    Prudy के द्वारा
    July 12, 2016

    Yes she told me about that and how nice it was to be with you 2.I always tried to incorporate apple into them,but being so thin, it never really worked like with it did wit,eixeshseming your cider recipe sounds perfect!We`ll have to try it!I don`t know who the swede was who came up with this recpie but…they really hit a home run!Where did you live down here?

Alka Gupta के द्वारा
March 24, 2011

वाहिद जी, आपकी कविता का शब्द विन्यास बहुत ही सुन्दर है! पर इस कविता के भाव……. इतनी उदासीनता क्यों…….आगे अब उत्साहपूर्ण भाव ही हों ऐसी उम्मीद करती हूँ….!

    Jock के द्वारा
    July 12, 2016

    Stephanie Parsons – Oh my word! What amazing pictures of two of the sweetest little blondies I know! The one of Allison and the umbrella is priceless – and could you have captured Ca7trr&#821e;s blue eyes any better! Amazing work! Can’t wait to see the rest!

Alka Gupta के द्वारा
March 24, 2011

वाहिद जी, आपकी कविता का शब्द विन्यास बहुत ही सुन्दर है पर ये कैसे भाव….. इतनी उदासीनता क्यों …..क्या हो गया….अब आगे से उत्साहपूर्ण भाव हों ऐसी उम्मीद करती हूँ !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    आदरणीया अलका जी, इस कठिन समय में आपके सहयोग और समर्थन के लिए आपका बहुत आभारी हूँ| देखिये कब ऊपरवाले का आदेश और आप लोगों का प्रेम यहाँ वापिस खींच लाये|

razia mirza listenme के द्वारा
March 24, 2011

ऐ’वाहिदे नादां’ इसे क्यूँ भूलता है तू, तेरा अदब, तेरी अदा, तेरा जो है मुक़ाम; एक शे;र आपके लिए वाहिदजी| वाह ! क्या कलाम तेरा और क्या हुनर है तेरा| तेरी ये गजल पर मेरे हो सो सो सलाम|

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    इस शानदार अंदाज़ में सलाम के लिए मेरा भी आपको सलाम रज़िया जी|

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 24, 2011

वाहिद भाई लफ्ज़ जरा मुश्किल है पर कलाम बहुत बेहतरीन. बहुत खूब.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    हौसले  हों तो कुछ भी मुश्किल नहीं दीपक जी| ग़ज़ल के ठीक नीचे देखिये|

    Jacki के द्वारा
    July 12, 2016

    He was buried on 15 April 2005, beside his wife, Princess Grace, at the Saint Nicholas Cathedral, the resting place of previous sovereign princes of Monaco and several of their wives, and the place where Prince Rainier and Princess Grace had been married in 1956. Because his death occurred shortly after that of Pope John Paul II, Ra;&rein#8217is death was overshadowed in the media.

ashvinikumar के द्वारा
March 24, 2011

आख़िरी मुलाक़ात है ये आख़िरी कलाम, चल दिए सफ़र पर लेकर तेरा ही नाम; आह वह लाल हथेली वह तुनकती मेंहदी, आज भी याद है वो तेरा पहला पयाम ,, तुमने जो कौल किया था कभी हंस हंस कर, आज भी वो ही वरक बने हैं मेरा ईमान ,, जिन्दगी बन न सकी मौत ही बन जाना , तेरी हर इक अदा पे मै होता कुर्बान ,,……………….भईया अउर भयानक तोड़ नाही मिलत रहल.ससुरा भेजा पिराए लागल …..जय भारत

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    वाह भाई साहब, एतना भयंकर तोड़ देवे लगबा तऽ कउने गल्ली से भागब ला हम? तोहरे ई तोड़वा से त हमरो मथवा पिराए लागल|

    Cade के द्वारा
    July 12, 2016

    None can doubt the vectiray of this article.

Rajan के द्वारा
March 24, 2011

लेता हूँ विदा यारों, नहीं अलविदा कहा है, बीते हैं दिन भी कितने, कर लूं ज़रा आराम; बहुत खूब वाहिद भाई..

aftab azmat के द्वारा
March 24, 2011

चल दिए सफ़र पर लेकर तेरा ही नाम;…वाहिद जी नमस्कार, बहुत सुन्दर रचना…बधाई…

Baijnath Pandey के द्वारा
March 24, 2011

आदरणीय श्री वाहिद जी ………….जिन्दा है तेरे दम पे महफ़िल की मयकशी तू मान यार मेरे कभी तो मेरी कही ………….आशा है जल्द ही आपका पुनरागमन होगा आपका अनुज बैजनाथ

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    प्रिय अनुज बैजनाथ जी, आपकी आशा निराधार नहीं है पर यह साकार कब होगी कहना कठिन है। धन्यवाद मेरी भावनाओं को समझने के लिए।

vinitashukla के द्वारा
March 24, 2011

मन में छुपे हुए दर्द और कसक का सजीव चित्रण. शब्दों का सुन्दर चयन. सार्थक पोस्ट के लिए बधाई.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    सराहना के लिए आपका बहुत धन्यवाद विनीता जी!

    Dalton के द्वारा
    July 12, 2016

    orice text scritic la adresa unei culegeri semnata de Tismaneanu este comanda. hai sa pastem oile mai bine decit sa ne spargem in figuri inaueectltle. sa vezi ce libido au birsaneleee

Harish Bhatt के द्वारा
March 24, 2011

वाहिद जी सादर प्रणाम, हर बार की तरह एक और बहुत ही शानदार कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    धन्यवाद हरीश जी प्रतिक्रिया के लिए।

    Chynna के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks Richard and Helen! Two more good ones. One of the blessings of this exercise to me is seeing how we all manage to express this amazing story using different words. A friend emailed me, reminding me that &#;2802Love God Love All” was a wonderful way to summarize the law and prophets.

March 24, 2011

वाहिद भैया, ये लो खडाऊं और लौट जाओ.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    वाह भईया, खड़ाऊँ तो पकड़ा दी अब सफ़र के राशन का बंदोबस्त कौन करेगा भला? कैसे भाई हो आप?

    March 28, 2011

    शुक्र है वाहिद कि तुम भरत की तरह वापस जेजे के मंच पर लौट गए. अब १४ वर्षों तक जेजे के मंच पर निष्कंटक राज करना. मेरी शुभकामनाएं तुम्हारे साथ है. खुली आँखों से देखना तो मुझे शायद मुमकिन न हो मन की आँखें खोल कर ही इस ‘राज’ का पता चलेगा.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    आपको तो खरबों की भीड़ में भी पहचान लूँगा क्यूँ कि दिल की ही आँख से देखता हूँ भईया| और जे जे पर राज वगैरह करने की कोई चाह नहीं है….हमने दिलों पर ही राज करना सीखा है..। आप मेरे दिल पर और मैं आपके दिल पर..बस किसी की क्या ज़रूरत। 

    King के द्वारा
    July 12, 2016

    Its nearly tuesday evening and no update. I saw this article linked from a few different mobile wesebtsi.was this just a scam to get more visitors to your site?

javed ahmed के द्वारा
March 24, 2011

माशा अल्लाह खुबसूरत पैगाम…बहुत खूब भाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    शुक्रिया जावेद भाई!

    Earthwind के द्वारा
    July 12, 2016

    Alah naik pon masih murah lagi berbading dengan negara jiran sebelah kita tu….lagi mahal minyak dei….aptu jawapan menteri kita budak sek.darjah 6 punya jawapan..

nishamittal के द्वारा
March 24, 2011

वाहिद भाई ,हमें कविता की इतनी समझ नहीं है कृपया पहले स्पष्ट कर दिया करें कि ये मात्र कविता के भाव हैं या कुछ और.कविता बहुत अच्छी है पर हमें युवाओं में जोशो-खरोश अच्छा लगता है.आप जैसे उत्साही व्यक्ति हँसते गाते अच्छे लगते हैं.

    div81 के द्वारा
    March 24, 2011

    मैं भी निशा जी कि बात से सहमत हूँ ………….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    March 28, 2011

    आदरणीया निशा जी, कविता के भाव भी हैं और हमारे भी। अब कुछ महीनों तक नदारद ही रहूँगा| ******************************* आपने भी सुन लिया होगा दिव्या जी


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