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"मेरा हिन्दुस्तान छोड़ दो!"

Posted On: 18 Aug, 2011 में

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india

राज कर रहे आज देश पर
सत्ता का अभिमान छोड़ दो,


हथकंडे-तरकीबें अपनी और
हर साज़ो सामान छोड़ दो,


देख रहे जो दिन में सपने
उनको ऐ बेईमान छोड़ दो,


समझ रहे हो हमको भोला
तुम ये भूल नादान छोड़ दो,


हैं करते आगाह तुम्हें तुम
ज़हरीली ये ज़बान छोड़ दो,


बहुत उजाड़ा तुमने इसको
यह पुष्पित उद्यान छोड़ दो,


फूट डाल कर लूटोगे फिर
ऐसा हर अरमान छोड़ दो,


निकलो-भागो, लौट के जाओ
मेरा हिन्दुस्तान छोड़ दो;

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105 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Anita Paul के द्वारा
August 31, 2011
alkargupta1 के द्वारा
August 30, 2011

वाहिद जी , आज कई दिनों बाद नेट खोलने पर Most Viewed में आपकी रचना देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई इस सप्ताह आपकी यह रचना निस्संदेह इसी सम्मान के ही योग्य थी….आपकी इच्छा बलबती हो…..देश छोड़कर जाने वाले फिर कभी लौटकर हमारे देश में न आयें…..सप्ताह का ब्लॉगर बनने पर हार्दिक बधाई !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 30, 2011

    आदरणीया अलका जी, आपका स्नेहाशीष सदैव मुझ पर ऐसे ही बना रहे यही मेरी कामना है। आपके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

rita singh 'sarjana' के द्वारा
August 29, 2011

वाहिद जी , बहुत सुन्दर भाव लिए हर शब्द में प्राण लिए देश प्रेम से सजी उच्च कोटि की कविता के लिए आपको बहुत -बहुत ,बधाईया स्वीकारे तथा मोस्ट विउड ब्लोग्गर बन्ने के लिए भी बधाई l

Abdul Rashid के द्वारा
August 29, 2011

भाई वाहिद लफ्जो की जादूगरी और दुश्मन हालाक बेहतरीन अंदाजे बयां

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 29, 2011

बहुत उजाड़ा तुमने इसको यह पुष्पित उद्यान छोड़ दो, प्रिय श्री वाहिद जी यह ज्वलंत अभिलाषा पूर्ण हो , दिल यही कह रहा है | बधाई , हार्दिक शुभ कामनाये |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 29, 2011

    आदरणीय बाजपेयी जी, आपकी बधाई ने मेरी हौसला अफ़ज़ाई की है। आप लोगों के आशीर्वादस्वरुप ही यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है। साभार,

sadhana thakur के द्वारा
August 28, 2011

वाहिद जी ……बहुत -२ बधाई हो …..बहुत सारीचीजों की जानकारी नहीं होने की वजह से आपको देर से बधाई दे रही हूँ ..दरअसल अभी नई हूँ न…. ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बनने के लिए ढ़ेर सी शुभकामनाये …………….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 29, 2011

    साधना जी, बधाई के लिए आपका शुक्रिया अदा करता हूँ। मैं भी जब अपने दूसरे ही लेख पर जब प्रथम बार सर्वाधिक देखा जाने वाला ब्लॉगर बना था तो मुझे ज्ञात ही नहीं था। वो तो जब अन्य ब्लॉगरों के बधाई सन्देश मिलने शुरू हुए तब मुझे असलियत का पता चला था। ब्लॉगिंग से सम्बंधित किसी पहलू की जानकारी के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकती हैं। पुनश्चः धन्यवाद के साथ,

sumandubey के द्वारा
August 28, 2011

वाहिद जी ब्लागर आफ द वीक बनने की ढेर सारी बधाई।

K M Mishra के द्वारा
August 28, 2011

सोनिया जी आपसे निवेदन है की हमारे अनुरोध (सोनिया भारत छोडो) का सम्मान करते हुए आपने पिछले कुछ दिनों से भारत छोड़ दिया है अब आपसे एक और अनुरोध है की कृपया भारत वापस न आयें. आपके पास तो वैसे ही इटली की नागरिकता है. आप चाहें तो भारत से लूटे हुए वो खरबों डॉलर जिन्हें आपने स्विस बैंक में  रख छोड़ा है,  आप रख सकती हैं, इतना नुकसान हुआ है थोडा और सही पर भारत वापस न आयें. अन्ना ने जो खुशी हमें दी है हम चाहते हैं की वह अब बरकरार रहे. और हाँ परिवार को भी साथ ले जाएँ.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 28, 2011

    प्यारे भाई, न जाने कबसे प्रतीक्षारत था आपकी एक अदद टिप्पणी के लिए। आपकी चुटीली प्रतिक्रिया में व्यक्त विचार का क्रियान्वन फ़िलहाल तो संभव नहीं दिख रहा पर अगर ऐसा हो सकता तो सचमुच कितना अच्छा होता।  साभार,

ajaysingh के द्वारा
August 27, 2011

हथकंडे-तरकीबें अपनी और हर साज़ो सामान छोड़ दो, फूट डाल कर लूटोगे फिर ऐसा हर अरमान छोड़ दो!!!!   प्रिय वाहिद भाई , आपने दिल को  छू लिया. इन नेताओं ने जनता में फूट डालने के घिसे-पिटे सारे हथकंडे आजमा चुके, कभी अन्ना जी को कुछ करने से पहले ही जेल भेजना, कभी अन्ना टीम में दलितों की जगह,कभी मुस्लिम भाइयों में संदेह पैदा करने की कोशिश से फूट डालने का जोकरपना , आदि आदि सब कुछ करके जनता के आगे अपनी औकात दिखा दी.   !!! आन्दोलन की प्रारम्भिक सफलता एवं इसकी पवित्रता बनी रहने की सभी लोगो को हार्दिक बधाई !!!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 28, 2011

    आपका बहुत शुक्रिया अजय जी प्रोत्साहन के लिए।

संदीप कौशिक के द्वारा
August 27, 2011

हार्दिक बधाई वाहिद भाई…..ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने के लिए ! :)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 28, 2011

    शुक्रिया संदीप जी यह आप ही लोगों का स्नेह है|

manoranjanthakur के द्वारा
August 27, 2011

बहुत बधाई

surendr shukla bhramar5 के द्वारा
August 27, 2011

प्रिय वाहिद भाई बहुत सुन्दर सन्देश और तमाचा …लेकिन इनका चमड़ा इतना मोटा है की गैंडा भी …न जाने क्या क्या कर रहे राग अलाप रहे इनके कान में न जाने क्या …..हमने तो इन्हें भारत में रहने दिया …आप ने अच्छा किया देश निकाला अगर न सुधरे तो …. हैं करते आगाह तुम्हें तुम ज़हरीली ये ज़बान छोड़ दो, बहुत उजाड़ा तुमने इसको यह पुष्पित उद्यान छोड़ दो, भ्रमर ५

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 28, 2011

    प्रिय भ्रमर जी, नमस्कार, मोटा चमड़ा ही सही मगर एक बार यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो गयी तो मोटी से मोटी चमड़ी को उधेड़ने वाला चाबुक हमारे हाथों में आ जाएगा। आभार सहित,

    surendra shukla bhramar 5 के द्वारा
    August 30, 2011

    प्रिय वाहिद भाई एक बार फिर बहुत बहुत मुबारकवाद मोस्ट विउड ब्लागर ऑफ़ दी वीक बनने पर -सच कहा आपने कुछ तो हाथ में आया और धीरे धीरे चाबुक भी आनी चाहिए हाथ में …काश ये जनता इस बार पूरी तरह जाग जाए .. भ्रमर ५

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 30, 2011

    बिलकुल भ्रमर जी, मैं भी आपकी राय से इत्तफ़ाक रखता हूँ। पुनः धन्यवाद आपका।

Arunesh Mishra के द्वारा
August 27, 2011

बहुत खूब वाहिद भाई..बहुत ओजपूर्ण कविता..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 27, 2011

    आपका बहुत शुक्रिया अरुणेश भाई प्रोत्साहन के लिए।

vasudev tripathi के द्वारा
August 27, 2011

वाहिद भाई, सम्मान योग्य कविता को सम्मान मिलने पर आपको हार्दिक बधाई॥ आज दो ही संदेश राष्ट्रहित में प्रासंगिक हैं, एक तो अंतर्घातियों के लिए कि देशद्रोहियों ये देश छोड़ दो। दूसरा- देशवासियों के लिए…… सिंह के सुतों पुनः सिंह सा दहाड़ दो विशुद्ध रक्त की तपिस, का आज तुम प्रमाण दो। दया क्षमा का भाव ही यदि मार्ग कंटकित करे, तो शत्रु मुंड रुंड से अविलंब तुम उखाड़ दो॥

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 27, 2011

    प्रिय अनुज वासुदेव जी, आपकी ओजस्विता आपके पद्य में झलक रही है। जब नरमी पूर्णतया विफल हो जाये तो गर्मी का प्रयोग तो अवश्यम्भावी है। सुन्दर कवितामयी प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रोत्साहन के लिये हार्दिक धन्यवाद।

नीरज नीखरा के द्वारा
August 26, 2011

जब छोड़ दिया ईमान तो ये स्थान छोड़ दो हिन्दुस्तान छोड़ दो मेरा हिन्दुस्तान छोड़ दो | neerajnikhra.jagranjunction.com

rajkamal के द्वारा
August 26, 2011

मंजिल नहीं है एक पड़ाव भर है यह दूर बहुत दूर आगे चलते चले जाना है बधाई कम मुबारकबाद । ************************************************* बादलों के पार मुझको चले जाना है यहाँ कोई अपना नहीं वहां पे अपना सारा जमाना है

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 27, 2011

    माँ सरस्वती की कृपा से आपका कवि हृदय बड़े दिनों बाद जागा है। सचमुच ये सब तो छोटे-मोटे पड़ाव हैं मंज़िल तो अभी दूर है।  आपका बहुत शुक्रिया सहयोग और समर्थन के लिए जो आपने हमेशा बिना मांगे दिया है।

जुबली कुमार के द्वारा
August 26, 2011

ढिंग चिका-ढिंग चिका रे ए ए ए ….. लख-लख बधाइयां…..

Tufail A. Siddequi के द्वारा
August 26, 2011

वाहिद भाई आदाब, बहुत-बहुत मुबारकबाद. http://siddequi.jagranjunction.com

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    तुफ़ैल भाई शुक्रिया। आपकी मुबारक़बाद क़ुबूल है।

rajeev dubey के द्वारा
August 26, 2011

बहुत सुन्दर, बधाई हो !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    आदरणीय राजीव जी, बहुत दिनों बाद आपसे सराहना पाकर सुखद अनुभव हुआ। आपका आभारी हूँ,

आर.एन. शाही के द्वारा
August 26, 2011

वाह ! दोनों हाथों में लड्डू ? बधाई ! राजाओं के इन्द्र ने हड़का दिया है, इसलिये ज़्यादा तारीफ़ नहीं करूंगा, परन्तु कविता इस सम्मान के सर्वथा योग्य थी । पुन: बधाई ।

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    ये सब आप ही के पुण्य आशीर्वाद का प्रताप है गुरुवर.. और लड्डू क्या कहिये.. ये तो दसों उँगलियाँ घी में और सर कड़ाही में वाली बात हो गयी है। तो टॉप ब्लॉग में भी और मोस्ट व्यूड में भी एक ही समय में होना एक अद्भुत संयोग ही तो है मगर सुखद भी है। राजाओं के इंद्र से तो आप ही समझें हम तो न आप से कुछ कह सकते हैं न उनसे ये आप दोनों का आपसी मुआमला है हाँ हमें ज़बरन खीच लिया गया तो बात और है। आशीर्वाद बनाये रखें अभी बहुत दूर तक जाना है। सनमन…

vikashraj के द्वारा
August 26, 2011

Black Money in Swiss banks mainly from India Indian money from in Swiss banks any other nationality. We have proof regarding these names, amount, and name of bank which we got from Rudolf Elmer we have 2000 names in the two discs the major share is from India. The source of income is from project hedge, From illegal share in stock market, drug deal, fake project the depositsin Swiss bank was started from early 1970s. Major share of Indian black money routed from Pakistan. We published the link in rapid share server address is 88.80.16.63 on port 9999 (SSL enabled). The Indian government needs to be more aggressive in tracking the black money stashed in foreign banks since Indians depositing money in foreign banks is debasing the rupee. Otherwise Wikileaks will do the job. Sl No. Name Amount [INR cr] Name of Bank Number of Accounts 1 Prabodh Mehta 28000 LGT bank of Leichenstein 2 Main (5 sub) 2 Cintan Gandhi 1956 LGT bank of Leichenstein 1 Main (3 sub) 3 Arun Mehta 2500 LGT bank of Leichenstein 1 Main 4 Ramdev Paswan 3500 Union BankairePrivee UBP 1 Main 5 Neera Radiya 289990 UBS 4 Main (13 sub) 6 Rajiv Gandhi 198000 UBS 7 Main (25 sub) 7 Naresh Goyal 145600 Bank CA St. Gallen AG 25 Main (3 sub) 8 M Karunanidhi Stalin 10500 Alternative Bank ABS 10 Main (5 sub) 9 Manoj Dhupelia 9850 LGT Bank of Leichestein 2 Main 95 sub) 10 A Raja 7800 Aareal Bank AG 1 Main (3 sub) 11 Harash Mehta (D) 135800 UBS AG 13 sub 12 SS Palanimanickam 4800 Rothschild Bank AG 1 Main (4 sub) 13 Ketan Parikh 8200 Bank COOP AG 5 Main (2 sub) 14 Paban Singh Ghatowar 3908 Bank aek Genossenschaft 2 Main (1 sub) 15 R Sports World 29800 Aargauische Kantonal Bank 5 Main (17 sub) 16 HD Kumaraswamy 14500 Bank Frei & Co. AG 1 Main (25 sub) 17 CP Krishnan Nair 4520 B I Di Investimenti 1 Main 18 Laloo Prasad Yadav 29800 AKB P Bank, Zurich AG 2 Main (1 sub) 19 J M Scindia 9000 Bank EEK AG 5 Main (3 sub) 20 Kalanidhi Maran 15000 Clariden Leu AG 15 sub 21 Karunanidhi 35000 Baloise Bank Soba 8 Main (sub) 22 Sarath Pawar 28000 Alternative Bank ABS 4 Main (7 sub) 23 Kamadi 5900 UBS 4 Main (5 sub) 24 Chithambaram 32000 Rothschild AG 19 sub 25 Raj Foundation 189008 LGT Bank of Leichestein 1 Main (45 sub) 26 Urvashi Foundation 289745 LGT Bank of Leichestein 2 Main (95 sub) 27 Ambrunova Trust 17658 LGT Bank of Leichestein 1 Main (13 sub) 28 Arun Kochar 15450 LGT Bank of Leichestein 14 sub 29 Prabodh Mehta 1480 LGT Bank of Leichestein 1 Main From: Prathiba Sundaram <prathibasam@yahoo.c

Santosh Kumar के द्वारा
August 25, 2011

वाहिद भाईजी,………..बहुत बधाई ,..बेमिसाल गरजती कविता ,..ब्लोगर ऑफ़ थे वीक तो होना ही था ,.ढेरों शुभकामनाये

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    संतोष जी, शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद आपका।

neelamsingh के द्वारा
August 25, 2011

वाहिद भाई देर से प्रतिक्रिया देने के लिए क्षमा चाहती हूँ | मेरी और से भी बधाई स्वीकार करें | काशी क्रांति का शंखनाद करने वालों की भूमि है | आपकी कविता शेर की दहाड़ है , ये ओजस्विता बनी रहे यही कामना है |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    नीलम जी, सबसे पहले तो आप अपने क्षमा के शब्द वापिस ले कर मुझे इस शर्मिंदगी के बोझ से मुक्त करें। इस कविता की रचना के पीछे कुछ हद तक आपकी प्रेरणा भी है और आपका इस छोटे भाई के ऊपर असीम स्नेह भी। आपका वरदहस्त इस तरह से बना रहा तो आगे और भी उच्च स्तर की प्राप्ति होगी। आपका आभार व्यक्त करके आपके योगदान का अपमान नहीं कर सकता.. स्नेहसिंचन बनाये रखें..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    और ये कहना तो भूल ही गया मैं कि आपकी जो छत्रछाया मिली है उसके आगे मेरे लिए ये सारे सम्मान और पुरस्कार फीके हैं, बौने हैं| सादर,

Ravindra K Kapoor के द्वारा
August 25, 2011

सशक्त कविता और समय की आवश्यकता के अनुरूप. मेरा अपना मानना है की कवि या लेखक को केवल इश्क और मुहब्बतों के अलावा कुछ अपने समाज और देश के लिए भी सोचना चाहिय. कविता और गीतों में समाज को बदलने की बहूत बड़ी शक्ति होती है. सुभकामनाओं के साथ…..रवीन्द्र

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    रविन्द्र जी, मेरा भी आप जैसा ही मानना है। सामन्यतः तो मैं भी प्रेम गीत लिखने वाला एक छोटा मोटा कवि ही हूँ पर वो कैसी रचनात्मकता जो अपने देश, अपनी माटी के काम न आ सके| आपका हार्दिक धन्यवाद,

Preeti Mishra के द्वारा
August 25, 2011

वाहिदजी ब्लॉगर ऑफ़ द वीक बनने के लिए बधाई. हमेशा की तरह फिर एक सशक्त कविता लिखी है आपने इसलिए ब्लॉगर ऑफ़ द वीक तो बनना ही था आपको.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    प्रीती जी, आप से तो सदैव ही सहयोग और सराहना दोनों ही मिले हैं| बहुत धन्यवाद आपका|

nishamittal के द्वारा
August 25, 2011

बधाई संदीप जी

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    सादर अभिवादन करते हुए आपकी बधाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया..

Amita Srivastava के द्वारा
August 25, 2011

ब्लागर  आफॅ दा वीक बनने की बधाई…….

Satish Mishra के द्वारा
August 25, 2011

वाहिद भाई, शानदार भाव उतनी ही खूबसूरत अभिव्यक्ति. बधाई. आज की खबरों पर आधारित एक लाइन जोड़ रहा हूँ. सैल्यूट करके, नज़र हटाने , का हर एक ख्वाब छोड़ दो.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 26, 2011

    सतीश भाई, हार्दिक धन्यवाद आपका इस कवितायुक्त प्रतिक्रिया के लिए।

Harish Bhatt के द्वारा
August 23, 2011

वाहिद जी नमस्ते. फूट डाल कर लूटोगे फिर, ऐसा हर अरमान छोड़ दो, निकलो-भागो, लौट के जाओ, मेरा हिन्दुस्तान छोड़ दो; बहुत ही शानदार कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 23, 2011

    आदरणीय हरीश जी, लंबे समय के वापसी पर आपकी प्रतिक्रिया मिली तो अतिशय प्रसन्नता हुई। बस मन के विचार उमड़ते घुमड़ते हुए न जाने क्या क्या बना डालते है और मैं जस का तस आप सब के समक्ष प्रस्तुत कर देता हूँ। आभार समेत,

div81 के द्वारा
August 22, 2011

सभी भारतीयों की दिल की आवाज को शब्द दिए है आप ने वाहिद जी | जोश और उत्त्साह बढाने के लिए धन्यवाद और बधाई आप को

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 23, 2011

    दिव्या जी, आपने अपनी प्रतिक्रिया में जो कहा है अगर मैं वास्तव में उसमें सफल हुआ हूँ तो मुझे बहुत ख़ुशी है क्यूंकि इस कविता की रचना की पीछे मेरा वास्तविक उद्देश्य भी यही था। धन्यवाद आपका प्रोत्साहन के लिए,

ashutoshda के द्वारा
August 21, 2011

वाहिद जी आदाब , लूट लिया बहुत अब और न लूटने देंगें भ्रस्टाचार से आज़ादी की अलख हर दिल में जगा के रहगें आशुतोष दा

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 22, 2011

    आशुतोष दा, सच कहा आपने अब तो यही शब्द हर हिन्दुस्तानी की ज़ुबान पर होगा। आभार,

sumandubey के द्वारा
August 21, 2011

वाहिद जी बहुत अच्छी लाइने है फूट डाल कर;;;;;;;;;जय हिन्द्।

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 21, 2011

    बस ह्रदय के उद्गार हैं मेरे सुमन जी| प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया अदा करता हूँ|

Kailash C Sharma के द्वारा
August 21, 2011

बहुत सुन्दर ओजपूर्ण और प्रेरक प्रस्तुति…बहुत सारगर्भित रचना…

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 21, 2011

    आदरणीय कैलाश जी, प्रोत्साहन एवं प्रतिक्रिया दोनों ही के लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

rajkamal के द्वारा
August 20, 2011

प्रिय वाहिद भाई …आदाब यह लाइने मैंने अपनी तरफ से नहीं बल्कि आपकी तरफ से कही थी ….. मेरी डिवाइस मेरे बॉस की बिटिया होमवर्क के लिए इस्तेमाल कर रही है आजकल कहीं आपने किसी सन्देश में कुछ इस मंच के बारे में तो नहीं कह दिया वैसे अगले महीने के पहले हफ्ते वोह शायद मेरे पास वापिस लौट आये …… अब तो मिलना लगा ही रहेगा और आपकी रचनाये अपने पूर्ण रूप में पढ़ने को मिलेंगी …… धन्यवाद

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 21, 2011

    प्रिय राजकमल भाई, नमस्कार, चलिए वो लाईनें जिसने भी कही जिसके लिए भी कही उसमें प्रेमभाव होना ही पर्याप्त है. आपकी पुनर्प्रतिक्रिया भी यही दर्शाती है. मैंने केवल आपके कुशलक्षेम के सन्देश ही भेजे थे अतः आपको चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है. कुछ ऐसा समय आ गया था की लौट कर आना अपरिहार्य तथा अनिवार्य हो गया था, सोचा अब नहीं तो कब? और बस हाज़िर हूँ| आभार,

आर.एन. शाही के द्वारा
August 20, 2011

‘काले अंग्रेज़ों भारत छोड़ो’ के विगुल में आपने एक और करारी फ़ूंक मार दी वाहिद जी ! बधाई ।

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 21, 2011

    आदरणीय शाही जी, बहती गंगा में हाथ धोने की तो हमारे देश में प्राचीन रीति है। और फिर काशी तो उलटी गंगा बहाने लिए विख्यात है, तो हम कहाँ चूकने वाले थे। हमारे पुष्पित उद्यान के पौधों की कोपलें तो आप ही की छत्रछाया में फल-फूल रही हैं। सादर,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 23, 2011

    और हाँ, मैं ये तो कहना भूल ही गया कि चचा ग़ालिब ने भी बनारस को शंख बजाने वालों का शहर कहा है तो फूंक तो मारनी ही थी क्यूंकि नाद का उद्घाटन तो हमें मिला नहीं.. ;)

omprakash के द्वारा
August 20, 2011

वाहिद साहब, एक बहुत सामयिक कविता. कवी संवेदनशील प्राणी होता है और वक़्त की हवा उसे प्रभावित करती है. आपकी इस कविता के तेवर वक़्त की आंधी को देखते हुए सटीक है हो सके और वक़्त मिले तो मेरी कविता “अन्ना तुझे सलाम” जरुर पढियेगा. oppareek43.jagranjunction.com

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 20, 2011

    ओमप्रकाश जी, एक महीने पूर्व की बात है मेरे एक मित्र ने मुझे प्रेरित किया देशभक्ति पर कुछ लिखने को.. मैं लिखने बैठा और शब्द जुड़ते चले गए और ये कृति आप लोगों के समक्ष आ गई। संवेदनाविहीन व्यक्ति मनुष्य तो क्या पशुओं की श्रेणी में भी नहीं आता और कवि के लिए तो संवेदना प्रथम अनिवार्यता है। समय मिलते ही आपकी कविता पर दृष्टिपात का प्रयास करूँगा। प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद आपका।

sadhana thakur के द्वारा
August 19, 2011

वाहिद जी ………बहुत ही सुन्दर रचना ..ऐसा लगता हैं एक बार फिर से वीर रस की रचनाओं से देश रसमय हो रहा हैं ..बधाई हो ……….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 20, 2011

    साधना जी, आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैं तो तन-मन-धन से इस प्रयास में लग गया हूँ। पुनश्चः धन्यवाद,

rajkamal के द्वारा
August 19, 2011

तेरा साथ है इतना प्यारा – कम लगता है जीवन सारा तुमसे मिलने को हमे आना ही पड़ा जागरण पे दुबारा

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 20, 2011

    भ्राता श्री, इतने दिनों से कहाँ ग़ायब थे आप, आप के इंतज़ार में रास्ता तकते-तकते आँखें पथरा सी गयीं थीं। और रही बात दुबारा आने की तो मेरे लौटने की पीछे भी आपकी अहम भूमिका है मगर लौटने पर आपको नहीं पाया तो कुछ वेदना भी हुई। लौट कर तो आपको आना ही पड़ेगा वरना हम तो पटियाले तक पहुँच जाएँगे आपके पीछे। आप के पीछे हाथ या पैर धो कर नहीं बल्कि गंगा मईया में नहा कर पड़े हैं। मेरे सन्देश का आशय समझ गए होंगे आप।

संदीप कौशिक के द्वारा
August 19, 2011

हर आमजन के दिल की आवाज़ को शब्दों का रूप दिया है आपने वाहिद भाई ! बहुत-बहुत आभार……!! :)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 20, 2011

    संदीप भाई, जब विचार मिल जायेंगे तो उद्गार तो स्वाभाविक रूप से समान होंगे, है ना.. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया आपका,

rahulpriyadarshi के द्वारा
August 19, 2011

ओजपूर्ण कविता,सामयिक सार्थक रचना…बहुत ही प्रेरक लगी….हिला दिया.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 20, 2011

    राहुल भाई, जिस हिलने के प्रयास (मूवमेंट) में हम-आप शामिल हैं उसके लिए थोड़ा कंपन पैदा करना भी अनिवार्य था। प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 28, 2011

    मुझे बहुत ख़ुशी है कि यह आलेख इस सप्ताह में सबसे अधिक चर्चित और प्रशंसनीय रहा,जल्द ही मैं वाराणसी आ रहा हूँ,आपसे पार्टी लेने के लिए :)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 28, 2011

    आप ख़ुश हैं तो मैं भी ख़ुश हूँ। आपके विचारों से मैं आरम्भ से प्रभावित रहा हूँ और आपसे मिलने की उत्कंठा भी पाल रखी है हाँ कभी इसे व्यक्त नहीं कर पाया ये दीगर है। वाराणसी आयें आपका सदैव स्वागत है। जब भी आयें तो मुझे मेरे सचल दूरभाष यंत्र जिसकी संख्या – 9598994488 है पर सूचित अवश्य कर दें।

नंदिनी के द्वारा
August 19, 2011

वाहिद जी, ये मेरी पहली प्रतिक्रिया है आप के ब्लॉग में | आप के सभी रचनाये पढ़ी है मगर सौभाग्य आज प्राप्त हो रहा है कहते है न देर आये मगर दुरुस्त आये | वीररस से भरी ये कविता आप कि बहुत पसंद आई |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    आपका शुक्रिया। आजकल आपकी कोई रचना नहीं आ रही। ऐसा क्यूँ?

abodhbaalak के द्वारा
August 19, 2011

बहुत सुन्दर वाहिद भाई, पर कहीं न कहीं ये हर उस के लिए है जो की भर्ष्टाचार ………………. और ऐसे तो भारत की ९५% जनता …………………., पापुलेशन बहुत घाट जाएगी भय्या.. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    अबोध भाई, आपका शुक्रिया। जब हम सुधरेंगे तभी तो जग सुधरेगा… भ्रष्टाचार कहाँ नहीं है मगर अन्य देशों में कर्तव्य के उल्लंघन के लिए भ्रष्टाचार होता है जबकि हमारे यहाँ अपने कर्तव्य के पालन में ही ….. बाक़ी तो आप स्वयं सुबोध हैं.. ;)

manoranjanthakur के द्वारा
August 19, 2011

बहुत सुंदर अति मनभावन

ashish के द्वारा
August 19, 2011

ऊर्जा से ओतप्रोत है रचना, पार्श्वा भाव भी निखरा हुआ है, वाह.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    प्रोत्साहन से सराबोर प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार आशीष जी..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 22, 2011

    कृपया अपना लिंक भी बताने का कष्ट करें।

Alka Gupta के द्वारा
August 18, 2011

वाहिद जी , देश के गद्दारों ,बेईमानों ,लूटनेवालों को हिंदुस्तान छोड़कर अब तो भागना ही है…..राष्ट्रप्रेम के प्रति ओजपूर्ण उत्कृष्ट रचना !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    आदरणीया अलका जी, सादर अभिवादन, आपकी प्रतिक्रिया ने मेरे जोश के जज़्बे में और भी उबाल ला दिया है और मैं और बेहतरीन सृजन के लिए उद्यत हो रहा हूँ.. पर वास्तविक रूप से भी इस आयोजन का भाग बन चुका हूँ| आभार समेत,

Santosh Kumar के द्वारा
August 18, 2011

वाहिद भाई ,.यह राष्ट्र के युवा की हुंकार है ,..मैं कामना करता हूँ जागरण परिवार इस रचना को दैनिक जागरण में स्थान दे ,.. ऐसी ओजपूर्ण रचना के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    संतोष भाई, ये राष्ट्र के युवा की हुंकार और मेरे हृदय का उद्गार दोनों ही है। आपकी प्रशंसा पाकर फूला नहीं समा रहा। बहुत शुक्रिया आपका,

shaktisingh के द्वारा
August 18, 2011

काले धन के पिछे छुपे काले नेता अपना भ्रष्टाचार व्यवहार छोड़ दो

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    आपकी प्रथम प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद शक्ति सिंह जी..

nishamittal के द्वारा
August 18, 2011

ईश्वर करे आपकी हुंकार राष्ट्र के प्रति उन अपराधियों तक पहुंचे और स्वप्न साकार हो.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    आदरणीया निशा जी, अब तो ईश्वर भी हमारे साथ ही नज़र आ रहे हैं| अण्णा के बाहर आते ही झमाझम बारिश ने उनका स्वागत कर दिया| आभार आपका,

Nikhil के द्वारा
August 18, 2011

छोड़ दो काले अंग्रेजों, मेरा हिन्दस्तान छोड़ दो. बहुत बढ़िया वाहिद भाई.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    August 19, 2011

    इसी आशा में ये पंक्तियाँ साकार हुई हैं निखिल भाई| शुक्रिया आपका प्रतिक्रिया के लिए|


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