सांस्कृतिक आयाम

भारतीय संस्कृति को समर्पित ब्लॉग © & (P) All Rights Reserved

24 Posts

4303 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 3669 postid : 975

"तुम कहाँ चले गए?"

Posted On: 13 Feb, 2012 कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

शब्द के मोती भाव-लड़ी में आज पिरो कर लाया हूँ

हृदय पुष्प की वास में भीगा गीत सुनाने आया हूँ

**

YouTube Preview Image

**

फिर से क्यूँ आ गया है, ये मौसम अजीब सा,

वो हो गया है दूर जो था क़रीब सा,

तुम कहाँ चले गए – तुम कहाँ चले गए;

**

अब तो है ऐसा लगता, मैंऽऽ हूँ कहीं,

दिल है कहीं मेरा और, मेरे पास कुछ नहीं,

तुम कहाँ चले गए – तुम कहाँ चले गए;

**

जाने क्यूँ मुझको अब भी, होता है ये एहसास,

जितनी भी दूर जाता हूँ तुम आते हो उतना पास,

तुम कहाँ चले गए – तुम कहाँ चले गए;

**

नज़रों से होके गुज़रे, कितने हसीं मगर,

कैसे करूँ बयां के, तुम दिल में गए उतर,

तुम कहाँ चले गए – तुम कहाँ चले गए;

**

===========================================

कृपया रचना का वास्तविक आनंद उठाने के लिए संलग्न विडियो में मेरे स्वर में गीत अवश्य सुनें.

सूचना: यह गीत एवं इससे आबद्ध सभी सामग्री लेखक द्वारा स्वरचित एवं अधिकृत हैं एवं बिना अनुमति इनका किसी भी रूप में उपयोग वर्जित है|

© & (P) सर्वाधिकार सुरक्षित All Rights Reserved

www.hamarivani.com



Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

72 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MAHIMA SHREE के द्वारा
February 28, 2012

फिर से क्यूँ आ गया है, ये मौसम अजीब सा, वो हो गया है दूर जो था क़रीब सा, तुम कहाँ चले गए – तुम कहाँ चले गए; नमस्कार वाहिद जी….बहुत ही उम्दा गजल…मन को छु गयी…. बहुत-२ बधाई….आप शायद रीडर ब्लॉग जागरण में अकेले गजलकार है…शुभकामनाये..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 28, 2012

    महिमा जी नमस्ते, मेरी ग़ज़ल आपको पसंद आई तो लिखना सार्थक सिद्ध हुआ। वैसे ग़ज़लनिगार तो बहुत हैं पाठकों में और वे लिखते भी ख़ूब हैं। पुनश्चः आभार आपका,

sinsera के द्वारा
February 16, 2012

वाहिद जी नमस्कार, बड़ी ही कशमकश में डाल दिया आपने. क्या तारीफ करूँ ? कुछ न कुछ छूट ही जायेगा .लिरिक्स, कम्पोजीशन ,आवाज़ सब लाजवाब, आप की आवाज़ में जो “vibreto ” है वो आप को एक professional singer भी बना सकता है. कभी कुछ और भी सुनाइएगा.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 17, 2012

    सरिता जी नमस्ते, अब भला इसमें कशमकश की क्या बात है। आपने मेरा गीत पढ़ा-सुना और सराहा बस उससे ज़्यादा की इच्छा भी नहीं रखता मैं। पिछले वर्ष भी दो गीत प्रस्तुत किये थे इसी अंदाज़ में जिनमें से एक बस कुछ ही दूर के नाम से आप अब भी मेरे ब्लॉग में ढूंढ कर सुन सकती हैं। आपने इतनी प्रशंसा कर दी कि मुझे कोई जवाब नहीं सूझ रहा फ़िलहाल हार्दिक आभार जता कर काम चला लेता हूँ। :-)

February 16, 2012

वाहिद भाई !बस एक ही शब्द इस रचना के लिए : लाजवाब !!!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    ढेर सारी लाजवाब ग़ज़लों के नायाब शाइर से मिली लाजवाब प्रतिक्रिया ने मुझे लाजवाब कर दिया। तहे दिल से शुक्रिया सूरज जी।

आर.एन. शाही के द्वारा
February 16, 2012

अरे वाह ! बधाई !! हम दोनों विक्रम-वेताल अगल बगल की खूंटियों पर लटके कितने अच्छे दिख रहे हैं ! मैंने खुजा दिया है, अब आप अपना फ़र्ज़ पूरा करो वरना सिर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे ।

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    बधाई मेरी तरफ़ से भी गुरुवर!!!! खुजाना तो सबसे ज़रुरी है वरना मरना पड़ेगा। आप खूँटी पर टंगे तो उतारने के लिए मुझे आना ही था मगर क्या पता था कि मुझे भी वहीं टांग दिया जाएगा। 

nishamittal के द्वारा
February 16, 2012

वाहिद जी,आपकी रचना और आवाज़ दोनों ही काबिले तारीफ़ हैं .जागरण मंच का आभार इतनी अच्छी प्रतिभाओं से हमारा परिचय मंच के माध्यम से हुआ है.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    आदरणीया निशा जी, आपके प्रोत्साहन से उन्नयन हेतु संबल मिलता है। प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार,

Mahendra Kumar Arya के द्वारा
February 16, 2012

प्रिय मित्र, मुझे ये जानकर ख़ुशी हुई कि जो आनंद हम लोग तुम्हारे साथ उठाते हैं उसे अब यहाँ तुम्हारे ब्लॉग के मित्रगण भी साझा कर रहे हैं. मज़ा आ गया.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    बिलकुल दोस्त। ज़िंदगी जीने का यही तो मज़ा है। शुक्रिया तुम्हारा प्रतिक्रिया के लिए।

अलीन के द्वारा
February 16, 2012

अस्स्ल्लाम वाल्लेकुम जनाब! बहुरत ही सुरीली आवाज है आपकी और साथ ही सुन्दर रचना…… बधाई कृपया मेरी सच्ची प्रेम कहानी पर अपना बहुमूल्य सुझाव और प्रतिक्रिया जरुर दीजियेगा…. मेरी सदा-एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    वालेकुमत सलाम अलीन साहिब, सराहना के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ।

    Santosh Kumar के द्वारा
    February 16, 2012

    वाहिद भाई जी ,.नमस्ते .. आपकी बनारसी चाय का स्वाद नहीं भूलता ,..वो दक्षिण भारतीय tareeke से बनाते हैं ,..रामेश्वरम में वैसे ही बनाते हैं ,…. लेमन चाय की रेसिपी बताइएगा …बहुत आभार

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    नमस्ते संतोष भाई, बनारस है ही ऐसा कि न तो ये खुद और न ही अपने किसी अनुभव को भूलने देता है। जिस भी चीज़ के साथ ‘बनारसी’ विशेषण लगा वो स्वतः ही विशिष्ट हो जाती है। कृपया रामेश्वरम की तस्वीरें फ़ेसबुक पर साझा करें और हो सके तो ब्लॉग रूप में यात्रा के संस्मरण भी प्रस्तुत करें। आपके लिए लेमन चाय जिसे यहाँ ‘लिकर’ कहते हैं की रेसिपी यहीं प्रस्तुत है – गिलास या कप में चीनी डाल लें, आधे निम्बू का रस निचोड़ लें, बाज़ार में उपलब्ध हाज़मोला के एक रुपये के पाउच को बिना खोले कूट लें और गिलास में आधी मात्रा डालें, आधी-आधी चुटकी पिसा भुना ज़ीरा और काला नमक डालें फिर साफ़ छन्नी में आवश्यकतानुसार चायपत्ती डाल कर ऊपर से धीरे-धीरे गर्म पानी डालते जाएँ। चम्मच से मिला कर गर्मागर्म सर्व करें। आनंद उठाइये ‘लिकर’ चाय का। :-)

Rachna Varma के द्वारा
February 15, 2012

वाहिद जी ,नमस्कार बहुत बढिया कविता साथ में आपकी आपकी आवाज भी मधुर है धन्यवाद

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    आपकी टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ रचना जी।

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 14, 2012

बहुत सुन्दर कविता वाहिद जी. जाने क्यूँ मुझको अब भी, होता है ये एहसास, जितनी भी दूर जाता हूँ तुम आते हो उतना पास, तुम कहाँ चले गए – तुम कहाँ चले गए; बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं.

roshni के द्वारा
February 14, 2012

wahid ji , जिस तरह आपकी रचनाये अच्छी है उसी तरह आपकी आवाज भी बहुत अच्छी है .. हमेशा की तरह सुंदर रचना के लिए बधाई आभार

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    धन्यवाद रोशनी जी। आपने भी हमेशा प्रोत्साहित कर के मेरा हौसला बढ़ाया है। पुनश्चः धन्यवाद के साथ,

abodhbaalak के द्वारा
February 14, 2012

वाहिद भाई सोरी, विडियो तो नहीं देख सुन सका पर आपकी इस रचना ने जगजीत सिंह के इसी नाम से गयी एक ग़ज़ल की याद दिला दी, सदा की भांति सुद्नर ग़ज़ल, ग़ज़ल में तो आप …………. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    अबोध भाई, ये गुस्ताखी माफ़ नहीं की जाएगी। इस गीत को सुनना तो पड़ेगा ही आपको चाहे जैसे भी और जब भी और उसके बाद प्रतिक्रिया दीजियेगा। इंतज़ार कर रहा हूँ। ;-)

Sumit के द्वारा
February 14, 2012

आपके अंदर बहुत साडी कलाए है,,,,,,आप की जितनी तारीफ की जाये वो कम है….. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/02/12/प्यार-का-मौसम/

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ सुमित जी।

    Sushil Kumar Rai के द्वारा
    February 16, 2012

    very good buddy. I’ve always been a fan of your phenomenal voice. This time I congratulate you for your success.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    thanks for your support and lovely words dear friend. :-)

div81 के द्वारा
February 14, 2012

पिछली बार भी आपने मंच में समां बांध दिया था अपनी कर्णप्रिय आवाज से लिखते तो आप सदा से ही लाजवाब है पिछली बार की तरह इस बार भी इस नायब तोहफे को मंच में रखने के लिए आप का शुक्रिया उम्दा संगीत और मधुर आवाज से सजे इस गीत के लिए आप को हार्दिक बधाई वाहिद जी

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    यह सब आप ही लोगों के स्नेह और प्रोत्साहन का नतीजा है जो मैं इस तरह के दुस्साहसिक प्रयास करने की जुर्रत कर पता हूँ दिव्या जी। एक डर भी लगा रहता है कि कहीं मैं आप सब की अपेक्षाओं पर उतरने में असफल न रहूँ। पर अंततः मेरी नैया आप लोगों के प्रेम की पतवार से पार लग ही जाती है। आपका आभार इतने सुंदर शब्दों में प्रोत्साहन के लिए। :-D

February 14, 2012

बहुत सुन्दर गीत रचना, मौसिकी और गायकी का कॉकटेल प्रस्तुत कर मन को सुकून पहुचाने के लिए हार्दिक बधाई… * * * * * (फाइव स्टार , लल्लन टॉप)…

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    वाह भईया वाह। आपकी प्रतिक्रिया भी आप ही की तरह अलबेली है। एकदम झक्कास…. :-D

Piyush Kumar Pant के द्वारा
February 14, 2012

बहुत सुंदर …… आवाज़ भी और अंदाज भी…..

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    आपका हार्दिक आभार पीयूष भाई। बहुत बहुत शुक्रिया।

ashvinikumar के द्वारा
February 14, 2012

प्रिय भाई यार इतनी शक्कर न खाया करो आवाज बहुत मीठी होती जा रही है ,,और एक गुजारिश है ऐसी ही शहद मेन घुली हुई आवाज लेकर रोज आया करो सुबह खुशनुमा हो जाती है ….:)जय भारत

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    प्रिय अश्विनी भाई, शुभ प्रभात, शक्कर से तो कब का किनारा किया हुआ है मगर फलों के फ्रुक्टोज़ पीछा नहीं छोड़ रहे। ;-) रोज़-रोज़ तो इसे ले कर आना मुमकिन नहीं है पर आप ये क्लिप ही डाउनलोड कर लीजिए और अपनी हर सुबह को खुशनुमा बनाया करिये। :-) वंदे मातरम..

akraktale के द्वारा
February 13, 2012

आदरणीय वाहिद जी, बहुत सुन्दर गीत मै तो पढ़ रहा था किन्तु जब आप गाने ही लगे तो मैंने पढ़ना बंद कर दिया और सुनना शुरू कर दिया. आपकी आवाज भी लाजवाब है. हार्दिक बधाई.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    आदरणीय अशोक जी, जानकर हर्ष हुआ कि आपने पढ़ने के स्थान पर सुन कर ही इस नज़्म का आनंद उठाया जैसा कि मैंने ऊपर आग्रह भी किया था। गीत को सुनने और सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार।

vinitashukla के द्वारा
February 13, 2012

सुन्दर शब्दों से बुनी हुई भाव-प्रणव कविता. इन शब्दों को स्वर देकर, आपने इस पोस्ट में चार चाँद लगा दिए हैं . बहुत बहुत बधाई.

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    आदरणीया विनीता जी, आपके प्रोत्साहन से युक्त सुंदर प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ आपका। सादर,

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 13, 2012

प्रिय वाहिद भाईजान ….. आदाब ! कभी अपने दिल में झाँक कर तो देखा होता ऐ मेरे हमदम हम वहीँ थे, लेकिन तुम ढूंडते रहे हमे वहां, जहाँ पर हम नहीं थे” टाटा फोटोन प्लस का असली फायदा आज उठाया जब उसने आपका यह क्लिप झट से डाउनलोड कर दिखाया अगर बुरा ना माने तो दो बाते कहनी चाहूँगा (क्योंकि कुत्ती चीज हूँ ) *ऐसा लगा की जैसे आपने पहले अपनी इस नज्म को किसी गीतकार से गंवाया फिर उसी की धुन पर आपने हुबहू इसको वैसा ही गाया ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ की क्योंकि महसूस हो रहा था की एक गीतकार इस गीत को तरन्नुम में बिना भटके और अटके गा रहा है….. *आखिर में आपने “तुम दिल में उतर गए” नहीं गाया क्यों यह तो आप ही जानते होंगे इस बार खाली मुबारकबाद नहीं दूँगा एक मेल भेझुंगा अपने खुद के मतलब के लिए हा हा हा हा हा हा हा हा हा

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    प्रिय राजकमल भाई नमस्कारम्! दो की जगह आप चार बातें भी कहते तो मुझे बुरा नहीं लगता क्यूंकि आप ही की तरह ये पिछले जन्म वाले संस्कार मुझ में भी मौजूद हैं। अब कुछ बातें मैं भी बता दूँ आपको - पहली कि इस नज़्म में मेरे अलावा किसी का भी योगदान कहीं से भी नहीं है इसके बोल, धुन और आवाज़ सभी शत प्रतिशत ख़ालिस मेरे हैं क्यूंकि मैं पाइरेसी में यक़ीन नहीं रखता। दूसरे - जितनी नज़्म आपको लिखी हुई दिख रही है उतनी मैंने गाई भी है शायद आपने ध्यान से सुनी नहीं या फिर उसे सुनते समय उसी में डूब गए। आपका खुद का मतलब भी मेरे लिए मेरे मतलब जैसा ही है आपकी मेल की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। आपकी ढेर सारी प्यारी बातों के लिए ढेर सारा शुक्रिया,

'राही अंजान' के द्वारा
February 13, 2012

आदरणीय वाहिद भाई, सादर अभिवादन ! समझ नहीं आ रहा कि आपके अल्फ़ाज़ की ज़्यादा तारीफ़ करूँ या आपकी आवाज़ की !! दोनों ही बहुत खूबसूरत हैं । दुआ करता हूँ कि ये आए दिन निखरते ही जाएँ !! :)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 16, 2012

    संदीप जी, प्यारी और निराली प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार। :-)

sadhana thakur के द्वारा
February 13, 2012

दिल के दर्द को सुकून देता संगीत से सजे भाव आत्मा को छू गई ,आपकी लेखनी और आवाज़ के बारे में और क्या कहूं …..बेहतरीन .बेहतरीन ,बेहतरीन ……….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    आपके प्रोत्साहन और प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत आभारी हूँ साधना जी।

chaatak के द्वारा
February 13, 2012

स्नेही वाहिद जी, आपकी आवाज़ में ये खूबसूरत नज़्म और भी ज्यादा अच्छी लगी| वेलेंटाइन दे की पूर्वसंध्या पर प्रेमी की ये विरह-वेदना के स्वर सुनकर लगा जैसे- प्रेम की टीस अभी भी दिलों में बाकी है, दुनिया के रंगमंच पर व्यापारियों की आमद से तराजुओं का प्रचलन भले आम हो गया हो लेकिन आँखे मूँद कर लुट जाने वाले किरदार अभी भी हैं| हार्दिक बधाइयाँ !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 14, 2012

    प्रिय चातक जी, आपको ये नज़्म पसंद आई जानकर ख़ुशी हुई। जज़्बा एक ऐसी शय है जो हमेशा ताज़ा रहता है। अलफ़ाज़ मन में उमड़ते घुमड़ते रहते हैं और कभी कभी एक धुन आकर उन्हें अपने घेरे में बाँध लेती है और फिर उन्हें प्रकट करना नितांत आवश्यक हो जाता है। मैंने हमेशा सबकी सुनी है मगर किया वही है जो मेरे मन को गवारा हुआ है। आपकी प्रेमपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार,

dineshaastik के द्वारा
February 13, 2012

शब्द रहित प्रतिक्रिया……. http://dineshaastik.jagranjunction.com/नेता- कुत्ता और वेश्या(भाग-2)

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    मैंने ऐसा क्या कह या लिख दिया दिनेश जी जो आप निःशब्द हो गए| प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार| समय मिलते ही आपकी ब्लॉग पोस्ट पढ़ता हूँ|

shashibhushan1959 के द्वारा
February 13, 2012

आदरणीय वाहिदजी, सादर ! अद्भुत ! अविस्मरनीय !! आह्लाद दायक !!! आपकी आवाज़ का जादू “यूं ट्यूब” पर भी जाकर सुन आया ! आपका कोई एल्बम वगैरह भी है क्या ? आप तो लाजवाब हैं ! हार्दिक आभार ! एक दिव्य अनूभूति की प्राप्ति कराने हेतु !!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी, सादर प्रणाम, आपकी उपमाएं पढ़ कर फूला नहीं समा रहा। पिछले वर्ष जे जे द्वारा आयोजित वैलेंटाइन कॉन्टेस्ट के दरमियाँ इस तरह की पोस्ट करने का विचार मन में आया था। तब ऐसी दो संगीतमय पोस्ट की थीं। इस वर्ष पुनः वही मौसम आया तो सोचा कि क्यूँ न कुछ ऐसा ही करूँ। ऐसे ही अनेक धुनरचित गीत मेरे पास मौजूद हैं जिन्हें अल्बम की श़क्ल देने की तमन्ना काफ़ी वक़्त से दिल में पाले हुए हूँ शायद कभी ऐसा मौक़ा आ ही जाए। आपके स्नेह एवं सम्मान से ज्ञात होता है कि आप और आपके विचार कितने उदात्त और महान हैं। आपके प्रोत्साहन एवं प्रशंसा दोनों के लिए आभार जैसा शब्द भी कम प्रतीत हो रहा है। सादर,

minujha के द्वारा
February 13, 2012

बहुत सुंदर सस्वर रचना वाहिद जी,बधाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    प्रोत्साहित करने के लिए हार्दिक आभार मीनू जी।

Amita Srivastava के द्वारा
February 13, 2012

वाहिद भाई वाह-वाह वाह भाव प्रबल इस गीत को स्वर भी मिलगये ,सुनकर आनंद आ गया ऐसे ही लिखते व गुनगुनाते रहिये

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    नमस्ते अमिता जी, आपने गीत को पढ़ा, सुना और सराहा इससे बढ़ कर क्या बात हो सकती है मेरे लिए। तआरीफ़ के लिए आपका शुक्रिया,

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 13, 2012

वाहिद भाई, नमस्ते आपकी कविताओं की कशिश ने मार डाला आपने बहुत अच्छा की की अपने अपनी आवाज़ को भी हमारे बिच प्रस्तुत किया इससे दो बाते हुई की आपकी लिखी कविताओं का मूल भाव हम जान सकें क्यूंकि ज्यादातर कविताओं के साथ ये होता है की कवी अपनी किसी ख़ास सोच के साथ लिखता है और पढने वाले लोग उसे कुछ और तरीकों से पढ़ते है जिसे उस कविते का मूल भाव मिट जाता है दूसरी बात की जितनी सुन्दर और भावनात्मक आपकी कवितायें होती है उतनी ही कर्णप्रिय आपकी आवाज़ भी है जिसे सुन कर निर्मल आनंद मिला बस यह भी बता देते की किनके जाने का ये दर्द निकल आया है, १२ और १४ के बिच में आया आपका ये नगमा कुछ और इशारे कर रहा है…………हा हा हा

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    भई आनंद जी, आवाज़ का मुज़ाहिरा तो पिछले वर्ष भी अपनी दो पोस्ट्स में पेश किया था। और आवाज़ को पेश करने का कारण भी आपने सही निकाला है कि इस रचना की प्रक्रिया में जो मनोभाव थे उसे पाठकगण भी महसूस कर सकें। दर्द और सुकून दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं बिना किसी एक को जाने दूसरे को नहीं जाना जा सकता। आप इस रचना में इशारे ढूंढ सके इसके लिए आपको साधुवाद। आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार,

mparveen के द्वारा
February 13, 2012

वाहिद जी सलाम , आपका गीत पढ़ा और सुना . इतना अच्छा लगा की क्या कहे तारीफ के लिए शब्द ही नहीं हैं … एक ही शब्द याद आ रहा है “SUPERB” …

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    नमस्ते परवीन जी, हौसलाअफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।

krishnashri के द्वारा
February 13, 2012

आदरणीय वाहिद जी , नमस्कार , बहुत सुन्दर, भाव प्रवण,कर्ण प्रिय कविता के लिए बधाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    आदरणीय कृष्ण श्री जी सादर नमस्कार, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका आभारी हूँ|

आर.एन. शाही के द्वारा
February 13, 2012

मेरे सामने का सिस्टम सक्षम न होने के कारण अभी आपकी स्वर लहरियों का आनन्द नहीं उठा पा रहा हूँ, लेकिन उत्कंठा तो तब तक रहेगी ही, जब तक देख-सुन न लूँ । विगत दिनों से उधर इसके मुखड़ों की बूंदाबांदी ज़ारी थी, और ऐसा लग रहा था कि जल्दी ही बारिश ज़रूर होगी । अब जाकर बादल झूम-झूम कर बरसे हैं, मय इंद्रधनुषी छटा के । साधुवाद !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    गुरुवर को प्रणाम! मेरी पोस्ट पर आपके चिरपरिचित अंदाज़ में आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बरबस ही मेरे होंठ कान तक खिंच गए। बारिश का आनंद उठाना है तो गर्मागर्म पकौड़े और हरी चटनी गुरुमाता से तैयार करवा लीजियेगा। सादर एवं साभार,

abhishektripathi के द्वारा
February 13, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    अवश्य अभिषेक जी। वक़्त मिलते ही आपके ब्लॉग पर दृष्टिपात करता हूँ।

Santosh Kumar के द्वारा
February 13, 2012

भाई जी ,.नमस्ते क्या लिखूं ?..आपकी बहुमुखी प्रतिभा को नमन करता हूँ !..बहुत बधाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    प्रिय संतोष भाई, आपका प्यार और सम्मान यूँ ही मिलता रहे यही मेरा अनमोल खज़ाना है|

alkargupta1 के द्वारा
February 13, 2012

वाहिद जी , आपका गीत पढ़ा और सुना भी बहुत सुन्दर और कर्णप्रिय लगा सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    आदरणीया अलका जी, सादर प्रणाम, आपकी प्रतिक्रिया सदैव ही हौसला बढ़ाती है। साभार,

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 13, 2012

आदरणीय वाहिद भाई, अभिवादन यही तो मैं भी पूछ रहा हूँ. आप आये बहार आई. स्वागत आपकी कविता का, और आपका

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    February 13, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन, प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रोत्साहन करने के लिए आपका हार्दिक आभार।


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran